
Sugar Price: भारत में गन्ने की खेती किसानों की आय और चीनी उद्योग से सीधे जुडी हुई है। ऐसे में गन्ने का उचित मूल्य तय करना केंद्र सरकार के लिए एक चुनौति बना हुआ है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों की मांगों और चीनी क्षेत्र से जुडे मुद्दों की समीक्षा के लिए नीति आयोग पूर्व सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है। यह समिति किसानों को बेहतर पारिश्रमिक, चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत (MSP), गन्ने की रिकवरी जांच और तौल प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार करेगी।
भारत सरकार के अनुसार, समिति का गठन कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसान प्रतिनिधियों की केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री और केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया निर्णय है। यह समिति खेती की लागत और अन्य संबंधित कारकों को ध्यान में रखते हुए गन्ना किसानों को मिलने वाले लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी की मांग की समीक्षा करेगी। हालांकि, सरकार ने अभी गन्ने के नए मूल्य की घोषणा नहीं की है। समिति की रिपोर्ट और सिफारिशों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी आगे विचार करेगा।
समिति चीनी की रिकवरी जांच और उसकी रिपोर्टिंग की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगी। इसमें रिकवरी के सत्यापन तथा चीनी मिलों में गन्ने की तौल के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनों की जांच, निरीक्षण और कैलिब्रेशन की पर्याप्तता भी शामिल होगी। इसके अलावा, मशीनों से कटाई किए गए गन्ने के वजन में की जाने वाली कटौती के तरीकों की भी जांच की जाएगी।
समिति यह आकलन करेगी कि मशीनी कटाई से वास्तव में कितना नुकसान होता है और वजन में कटौती का किसानों को मिलने वाले गन्ना मूल्य पर कितना वित्तीय प्रभाव पडता है। जरूरत के अनुसार अन्य संबंधित विषय भी समीक्षा में शामिल किए जा सकते हैं।
समिति किसानों के प्रतिनिधियों, चीनी मिल संघों, राज्य सरकारों और संबंधित विशेषज्ञों से विचार-विमर्श करेगी। इसके सदस्य कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि आयुक्त, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव (चीनी) और उपभोक्ता मामले विभाग के संयुक्त सचिव (विधिक माप विज्ञान) होंगे। समिति अपनी रिपोर्ट और विशिष्ट सिफारिशें यथाशीघ्र सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगी।