
Great Nicobar Project: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह लंबे समय से रणनीतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। यहां की जैव विविधता और आदिवासी समुदायों की मौजूदगी इसे और संवेदनशील बनाती है। इसी बीच केंद्र सरकार के ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जहां राहुल गांधी ने इसे देश के प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे बड़ा घोटाला और गंभीर अपराध बताया है।
सरकार का यह मेगा प्रोजेक्ट करीब 92,000 करोड़ रुपये का है, जिसका उद्देश्य द्वीप को एक रणनीतिक और आर्थिक हब के रूप में विकसित करना है। इस योजना के तहत एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, इंटीग्रेटेड टाउनशिप, सिविल और मिलिट्री उपयोग वाला एयरपोर्ट और 450 MVA गैस व सोलर पावर प्लांट बनाया जाएगा। यह पूरा प्रोजेक्ट लगभग 166.10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, जिसमें 130.75 वर्ग किलोमीटर वन भूमि शामिल है। सरकार के अनुसार, इस क्षेत्र में कुल 18.65 लाख पेड़ हैं, जिनमें से करीब 7.11 लाख पेड़ों की कटाई हो सकती है। हालांकि, 65.99 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ग्रीन जोन के रूप में सुरक्षित रखने का दावा किया गया है।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस परियोजना का कड़ा विरोध किया है। उन्होंनेअपने निकोबार दौरे को लेकर एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा, कि यहां लाखों पेड़ों को काटने के लिए चिन्हित किया गया है। यह विकास नहीं है, यह विकास की भाषा में छिपा विनाश है। उन्होंने आगे कहा कि ग्रेट निकोबार में जो हो रहा है, वह हमारे जीवनकाल में देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे बड़ा घोटाला और गंभीर अपराध है। इसे रोका जाना चाहिए और यह रुक सकता है। राहुल गांधी ने स्थानीय निकोबारी समुदाय और पूर्व सैनिक परिवारों से भी मुलाकात की और उनकी चिंताओं को सुना।
केंद्र सरकार ने इन आरोपों के बाद एक विस्तृत फैक्टशीट जारी की है। इसमें कहा गया है कि इस परियोजना को सभी पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया के बाद स्वीकृति मिली है और इसमें 42 शर्तें पर्यावरण संरक्षण के लिए लागू की गई हैं। सरकार का कहना है कि यह प्रोजेक्ट भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, समुद्री ताकत और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा उपस्थिति को मजबूत करेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि निकोबारी और शोम्पेन जनजातियों का कोई विस्थापन नहीं किया जाएगा।
हालांकि, स्थानीय निकोबारी समुदाय ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। समुदाय का कहना है कि उन्होंने ट्राइबल रिजर्व को डिनोटिफाई करने के लिए दिया गया एनओसी वापस ले लिया है। सरकार के अनुसार, प्रोजेक्ट क्षेत्र का 84.10 वर्ग किलोमीटर हिस्सा ट्राइबल रिजर्व से ओवरलैप करता है, जिसमें से 11.032 वर्ग किलोमीटर पहले से 1972 से रेवेन्यू लैंड के रूप में उपयोग हो रहा है। शेष 73.07 वर्ग किलोमीटर को डिनोटिफाई किया जाएगा, जबकि 76.98 वर्ग किलोमीटर को नए ट्राइबल रिजर्व के रूप में जोड़ा जाएगा। लेकिन समुदाय का आरोप है कि उनके फॉरेस्ट राइट्स अब तक तय नहीं हुए हैं और उन्हें अपनी जमीन छोड़ने के लिए दबाव डाला जा रहा है।