
Abhijeet Dipke Speaks to Devendra Mahto : देवेंद्र महतो से वीडियो कॉल पर हुई अभिजीत दिपके की बातचीत, लाठीचार्ज का किया जिक्र (फोटो सोर्स:@DevendraNathMa9)
Devendra Mahto Lathi Charge: रांची में JPSC-JSSC भर्ती में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को हिंसक टकराव में बदल गया। नौ दिन से अनशन कर रहे JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो भी विधानसभा घेराव मार्च में शामिल हुए, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। अस्पताल पहुंचने के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने उनसे वीडियो कॉल पर बात की। डिपके के मुताबिक, महतो ने पुलिस लाठीचार्ज में चोट लगने और सीने में दर्द की बात कही।
एक तरफ छात्रों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, वहीं प्रशासन का कहना है कि भीड़ में से कुछ लोगों ने पथराव किया और एक जवान की जान खतरे में पड़ने के बाद न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया। इस टकराव के बाद झारखंड की सियासत भी गरमा गई है और बीजेपी ने मंगलवार को राज्यव्यापी बंद का ऐलान किया है।
सोमवार देर रात CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने अस्पताल में भर्ती देवेंद्र नाथ महतो से वीडियो कॉल पर बातचीत की। बातचीत के बाद डिपके ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा करते हुए दावा किया कि महतो ने उन्हें बताया कि अस्पताल ले जाने से पहले पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया था।
दीपके के अनुसार, महतो ने चोट लगने के साथ सीने में दर्द की भी शिकायत की। नौ दिनों से जारी भूख हड़ताल के बीच पुलिस कार्रवाई में घायल होने का यह दावा आंदोलन को लेकर चिंता और बढ़ाता है।
दीपके ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों के खिलाफ ऐसी कथित कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने देवेंद्र महतो के आंदोलन के प्रति समर्थन जताते हुए उन्हें ‘सच्चा हीरो’ बताया।
देवेंद्र नाथ महतो झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे आंदोलन का प्रमुख चेहरा हैं। वह पिछले नौ दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे।
स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद सोमवार को उन्होंने विधानसभा घेराव मार्च में हिस्सा लिया। दिनभर चले प्रदर्शन के बाद उनकी तबीयत और खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यह आंदोलन अचानक शुरू हुआ विवाद नहीं है। जुलाई के आखिरी सप्ताह में भी हजारों छात्रों ने रांची में मार्च निकालकर 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग उठाई थी। छात्रों की प्रमुख मांगों में निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई शामिल है।
सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र ‘विधानसभा घेराव’ के लिए आगे बढ़े। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ने के बाद हालात बेकाबू होने लगे। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए पहले पानी की बौछार का इस्तेमाल किया और बाद में आंसू गैस तथा लाठीचार्ज किया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बिना पर्याप्त चेतावनी के बल प्रयोग किया। एक घायल प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि करीब 100 युवाओं पर लाठीचार्ज हुआ। कुछ प्रदर्शनकारियों ने शरीर, पीठ, हाथ और सीने में चोट लगने की बात कही।
वहीं प्रशासन ने इन आरोपों को एकतरफा तस्वीर बताया है।
रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि सुरक्षाबलों ने शुरुआत में संयम बरता। उनके मुताबिक, भीड़ में मौजूद कुछ ‘असामाजिक तत्वों’ ने माहौल भड़काने की कोशिश की और एक जवान पर पत्थर फेंका गया।
प्रशासन का यह भी दावा है कि एक अन्य जवान भीड़ के बीच फंसकर दबने की स्थिति में आ गया था और उसकी जान को खतरा पैदा हो गया था। इसके बाद जवान को सुरक्षित निकालने के लिए पुलिस ने ‘न्यूनतम बल’ का इस्तेमाल किया।
डीसी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों से बार-बार हटने की अपील की गई, लेकिन भीड़ के नहीं हटने पर स्थिति सामान्य करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी। प्रशासन ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों ने संयम बनाए रखा, लेकिन कुछ लोगों की गतिविधियों से स्थिति तनावपूर्ण हुई।
Updated on:
11 Aug 2026 09:56 am
Published on:
11 Aug 2026 09:29 am
