
कट्टरपंथी अमृतपाल सिंह (फोटो सोर्स- ANI)
Punjab Election: साल 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से हलचल तेज हो गई है। जेल में बंद खडूर साहिब से सांसद और सिख कट्टरपंथी अमृतपाल सिंह के संगठन 'वारिस पंजाब दे' (अकाली दल - वारिस पंजाब दे) ने चुनावी मैदान में उतरने की पूरी तैयारी कर ली है। इसी में पार्टी ने आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपने पहले उम्मीदवार के नाम का ऐलान भी कर दिया है।
पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की साजिश में दोषी ठहराए गए केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह को अपना पहला प्रत्याशी घोषित किया है। अमृतपाल सिंह के इस दांव को पंजाब की पंथिक राजनीति का बड़ा दांव माना जा रहा है।
61 वर्षीय सतवंत सिंह फतेहगढ़ साहिब जिले के मुस्तफाबाद गांव के रहने वाले हैं और बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। वह फतेहगढ़ साहिब की बस्सी पठाना विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ेंगे। अमृतसर में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय उनके नाम का ऐलान किया गया। इस प्रेस वार्ता में 'वारिस पंजाब दे' के कार्यकारी अध्यक्ष और अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह के साथ फरीदकोट से निर्दलीय सांसद सरबजीत सिंह खालसा भी विशेष रूप से मौजूद थे।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को उनके दो सुरक्षाकर्मियों बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने हत्या कर दी थी। इस पूरी साजिश का आरोपी केहर सिंह को माना गया था, जिन्हें 6 जनवरी 1989 को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। पंजाब की राजनीति में इस कट्टरपंथी पंथिक विचारधारा का प्रभाव हाल ही में 2024 के लोकसभा चुनाव में भी इसका असर देखने को मिला था। इस चुनाव में बेअंत सिंह के बेटे सरबजीत सिंह खालसा ने फरीदकोट सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में शानदार जीत हासिल की थी। वहीं, 'वारिस पंजाब दे' के प्रमुख अमृतपाल सिंह ने भी जेल में बंद रहने के बावजूद खडूर साहिब सीट से चुनाव जीता था। 2024 के लोकसभा चुनाव में सतवंत सिंह ने ही सरबजीत सिंह खालसा के लिए चुनाव प्रचार भी किया था।
पार्टी के चुनावी एजेंडे को लेकर अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने साफ किया कि उनका मकसद सिर्फ राजनीतिक सत्ता हासिल करना नहीं है। पार्टी का मेन फोकस पंथिक सिद्धांतों, सिख समुदाय की पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले परिवारों को सम्मान देने पर रहेगा। उन राजनीतिक आलोचनाओं का जवाब देते हुए, जिनमें कहा गया था कि संगठन पुराने बलिदानी परिवारों से दूरी बना रहा है, तरसेम सिंह ने कहा कि पार्टी ऐसे परिवारों को केवल जुबानी समर्थन नहीं दे रही है, बल्कि उन्हें सीधे राजनीतिक और संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी सौंप रही है। आने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी राज्य के क्षेत्रीय अधिकारों, सिख राजनीतिक बंदियों की रिहाई और प्रमुख पंथिक परिवारों के प्रतिनिधित्व के मुद्दे को मजबूती से उठाएगी।
Updated on:
11 Aug 2026 09:17 am
Published on:
11 Aug 2026 08:58 am
