
कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन | फोटो सोर्स- IANS
Rajmohan Unnithan: केरल में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को पूरा गाने को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार के निर्देशों और राज्य के मुख्य सचिव द्वारा जारी एक सर्कुलर के सामने आने के बाद पक्ष और विपक्ष दोनों ही केंद्र के फैसले के खिलाफ नजर आ रहे हैं। कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने साफ कहा है कि केरल में राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण नहीं गाया जाएगा। उन्होंने साफ कहा है कि राज्य में वर्षों से चली आ रही परंपरा के हिसाब से ही केवल शुरुआती दो लाइनें (अंतरा) ही गाई जाएंगी। कांग्रेस सांसद ने तो यहां तक कह दिया कि भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें गोली मारने की बात कहें, लेकिन इस जन्म में केरल में पूरा वंदे मातरम नहीं गाया जाएगा।
इस पूरे विवाद की शुरूआत केरल के मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा द्वारा 6 अगस्त को जारी किया गया एक शासकीय पत्र है। यह पत्र संस्कृति मंत्रालय के 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत जारी किया गया था, जो 9 से 17 अगस्त तक आयोजित होना है। इस पत्र में बताया गया था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति की मंजूरी के बाद राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने के अवसर पर इसे 'आजादी का अमृत महोत्सव' के साथ जोड़ा गया है। इसी वजह से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कमेटी ने तय किया था कि सभी सरकारी कार्यक्रमों में झंडा फहराने के साथ पूरा वंदे मातरम गाया जाएगा और साथ ही नागरिकों को डिजिटल पोर्टल पर तिरंगे के साथ सेल्फी अपलोड करने को भी कहा गया था।
मुख्य सचिव के इस पत्र पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा कि केरल की अपनी एक तय व्यवस्था है और राज्य सरकार अपने ही प्रोटोकॉल का पालन करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव का काम केंद्र के निर्देशों से अवगत कराना होता है, लेकिन राज्य इसे लागू करने के लिए बाध्य नहीं है। मुरलीधरन ने यह भी साफ किया कि शपथ ग्रहण समारोह जैसे कार्यक्रमों में पूरा वंदे मातरम इसलिए गाया गया था क्योंकि वहां राज्यपाल मौजूद थे और संवैधानिक मर्यादा के तहत राज्यपाल की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों में केंद्र के नियमों का पालन किया जाता है। राज्य सरकार के अपने बाकी सभी कार्यक्रमों में पुराना नियम ही चलेगा और राष्ट्रगीत के केवल पहले दो अंतरा ही गाए जाएंगे।
इस मुद्दे पर केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि वामपंथी पार्टियां भी विरोध में उतर आई हैं। CPI(M) के राज्य सचिव एमवी गोविंदन मास्टर ने आरोप लगाया कि राज्य का प्रशासनिक ढांचा संघ के दबाव में काम कर रहा है। वामपंथी नेताओं का कहना है कि मुख्य सचिव का यह पत्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंडे को लागू करने की एक कोशिश है, इसलिए इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि केरल की अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराएं हैं, जिनसे कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
Updated on:
10 Aug 2026 12:15 pm
Published on:
10 Aug 2026 11:59 am
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