
Jharkhand Student Protest: ‘कंटीले तार हमें नहीं रोक सकते’, भूख हड़ताल के बीच मार्च में पहुंचे देवेंद्र नाथ महतो (फोटो सोर्स: ANI)
Jharkhand Vidhan Sabha March: जेपीएससी-जेएसएससी भर्तियों में धांधली के आरोपों को लेकर झारखंड का सियासी पारा हाई है। प्रशासन की पाबंदियों और सुरक्षा के कड़े पहरे को धता बताते हुए युवाओं ने पुलिस की तीन लेयर की बैरिकेडिंग तोड़ डाली। भूख हड़ताल पर होने के बावजूद आंदोलन में शामिल हुए नेता देवेंद्र महतो के तीखे तेवरों ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों युवाओं के हुजूम और पुलिस छावनी के साये में है। मौका है जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आहूत विधानसभा मार्च का, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। सरकार और पुलिस महकमा किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही मुस्तैद था, लेकिन छात्रों के जज्बे ने सारे सुरक्षा घेरों को नेस्तनाबूद कर दिया।
सोमवार को रांची में हालात तब तनावपूर्ण हो गए जब हजारों की संख्या में छात्र और युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए विधानसभा के आसपास धारा 144 (निषेधाज्ञा) लागू कर दी थी और चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात किया था। सुरक्षा के मद्देनजर कई परतों में बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन युवाओं का जोश बैरिकेड्स की इन दीवारों पर भारी पड़ा।
इस आंदोलन का सबसे बड़ा चर्चा का विषय रहे JLKM नेता देवेंद्र महतो। पिछले कुछ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र महतो ने अस्वस्थ होने के बावजूद आंदोलन से पीछे हटने से इंकार कर दिया। वह एंबुलेंस में सवार होकर सीधे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे, उनके हाथ में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर थी।
मौके पर मौजूद पत्रकारों और समर्थकों से बात करते हुए देवेंद्र महतो ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, "भूख से ज्यादा ये कंटीले तार चुभ रहे हैं, लेकिन हमारी जिद इन बैरिकेडिंग से कहीं ज्यादा मजबूत है।" सरकार द्वारा किए गए भारी सुरक्षा इंतजामों और तीनहरी बैरिकेडिंग पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आखिर सरकार छात्रों की जायज मांगें मानने के बजाय अराजकता का माहौल क्यों पैदा करना चाहती है?
दूसरी ओर, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए झारखंड पुलिस के आला अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। एडीजी (मुख्यालय) मनोज Kaushik ने प्रदर्शनकारियों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की थी ताकि कोई उपद्रवी तत्व इस माहौल का फायदा न उठा सके। वहीं रांची एसएसपी राकेश रंजन ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था कायम रखना सबकी जिम्मेदारी है और प्रशासन नहीं चाहता कि किसी भी तरह के व्यवधान से छात्रों के भविष्य पर आंच आए।
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को भी गरमा दिया है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि प्रशासन सत्ता के दबाव में विपक्ष और आंदोलनकारियों की आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है, जिसके तहत बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू को नजरबंद किए जाने की भी बात सामने आई।
फिलहाल, रांची की सड़कों पर युवाओं का सैलाब और सरकार के बीच खिंची तनातनी यह साफ इशारा कर रही है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ने वाला है। छात्र अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, ऐसे में देखना यह होगा कि सरकार इस सुलगते मामले पर क्या रुख अपनाती है।
Updated on:
10 Aug 2026 12:46 pm
Published on:
10 Aug 2026 12:42 pm
