
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी (Photo-IANS)
Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न मांगों को लेकर गतिरोध जारी है। विपक्षी दल के सांसद वेल में आकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोल चुके हैं। गतिरोध खत्म करने के सवाल पर प्रियंका गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि संसद में जारी गतिरोध तभी खत्म होगा जब गृह मंत्री सदन में आकर बयान देंगे। केरल की वायनाड सीट से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि कि जब तक यह बयान नहीं आता, सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बना रहेगा।
उधर, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। राहुल ने कहा कि 20 जुलाई को नीट यूजी पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई अमित शाह के निर्देश पर हुई। राहुल गांधी ने द हिंदू में लिखे एक लेख को साझा करते हुए एक्स पर लिखा कि जो छात्र अपने भविष्य के बारे में शांति से सवाल पूछ रहे थे, उन पर छर्रे, नुकीले डंडे और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने युवा छात्राओं को पीटा, जिनमें से कई के निजी अंगों पर चोटें आईं और नाबालिगों की हड्डियां तक टूट गईं। उनका कहना था कि मोदी सरकार सवाल पूछने का जवाब इस तरह से देती है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि घटना के 20 दिन बीत जाने के बाद भी केंद्रीय गृह मंत्री शाह सदन में जवाब देने के लिए नहीं आए हैं। उन्होंने विपक्ष की हर चर्चा की मांग को खारिज कर दिया है। राहुल ने कहा कि गृह मंत्री की यह चुप्पी कोई भूल नहीं, बल्कि हिंसा को दी गई मंजूरी है। उन्होंने कहा कि या तो उन्हें घटना की पूरी जानकारी थी, या उन्हें कुछ भी पता नहीं था। वह या तो दोषी है, या फिर अक्षम। दोनों ही स्थिति में उन्हें जिम्मेदार बताते हुए राहुल ने इस्तीफे की मांग कर दी।
राहुल ने यह भी जोड़ा कि दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स दोनों ही सीधे गृह मंत्री को रिपोर्ट करते हैं, और जंतर मंतर पर हुई यह घटना संसद से महज 500 मीटर की दूरी पर हुई। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करते हुए कहा कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होती।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विदेशी अंशदान नियमन संशोधन बिल और आने वाले परिसीमन को लेकर कहा कि सरकार देश में तानाशाही लागू करना चाहती है। उनका कहना था कि इस देश में तानाशाही नहीं चल सकती और सरकार विरोधी आवाजों तथा सिविल सोसाइटी संगठनों को दबाने के लिए पूरे संस्थानों पर कब्जा करना चाहती है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के सवालों पर कहा कि कौन सा मंत्री सदन में आकर बयान देगा, यह फैसला विपक्ष नहीं बल्कि सरकार खुद करेगी।
Updated on:
10 Aug 2026 11:57 am
Published on:
10 Aug 2026 11:57 am
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