
GST Council Meeting: दिल्ली के भारत मंडपम में गुरुवार को GST काउंसिल की अहम बैठक हुई। बैठक में काउंसिल ने GST व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति को पूरी तरह खत्म करने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा GST के तहत मुकदमा चलाने की सीमा भी बढ़ाई गई है। काउंसिल ने इस सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का फैसला किया है। काउंसिल के इस फैसले के बाद GST मामलों में गिरफ्तारी के प्रावधान को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है। वहीं, अभियोजन की सीमा बढ़ने से 5 करोड़ रुपये तक की सीमा से जुड़े मामलों पर भी नए प्रावधान लागू होंगे। काउंसिल ने अपराधों में न्यूनतम सजा के प्रावधान को भी हटाने का फैसला किया है। इसके अलावा सामान्य जुर्माने की अधिकतम राशि को 25,000 से घटाकर 10,000 रूपये करने का निर्णय लिया गया है।
GST व्यवस्था में प्रवर्तन से जुड़े अधिकारियों के पास गंभीर टैक्स अपराधों के मामलों में गिरफ्तारी की शक्ति थी। GST काउंसिल ने अब इस प्रावधान को खत्म करने का फैसला किया है। इस बदलाव के बाद GST मामलों में गिरफ्तारी से जुड़े मौजूदा प्रावधानों में बड़ा बदलाव होगा। हालांकि, नए प्रावधानों के लागू होने की प्रक्रिया और संबंधित कानूनी बदलाव भी महत्वपूर्ण होंगे।
GST से जुड़े अपराधों में अभियोजन की सीमा को भी बढ़ाया गया है। पहले जहां 1 करोड़ की सीमा थी, उसे बढ़ाकर 5 करोड़ रूपये कर दिया गया है। इसका मतलब है कि GST कानून के तहत आपराधिक अभियोजन से जुड़े मामलों में अब संशोधित सीमा लागू होगी। छोटे कर विवादों और अनुपालन से जुड़ी गलतियों को लेकर आपराधिक कार्रवाई का दायरा इससे प्रभावित होगा।
GST काउंसिल ने अपराधों के लिए तय न्यूनतम सजा के प्रावधान को हटाने का फैसला किया है। अब सजा का निर्धारण मामले की परिस्थितियों और कानून के तहत न्यायपालिका के विवेक के आधार पर किया जाएगा। सजा में जुर्माना, जेल या दोनों का प्रावधान हो सकता है। काउंसिल का यह बदलाव GST से जुड़े आपराधिक मामलों में सजा तय करने की व्यवस्था को अधिक लचीला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक में सामान्य या डिफॉल्ट पेनल्टी की राशि में भी बदलाव किया गया है। जिन मामलों में किसी अपराध के लिए अलग से जुर्माने की राशि निर्धारित नहीं होती थी, वहां पहले 25,000 तक का सामान्य जुर्माना लगाया जा सकता था। अब इस राशि को घटाकर 10,000 करने का फैसला लिया गया है।
काउंसिल ने देर से रिटर्न दाखिल करने, गलतियां करने या टैक्स भुगतान में देरी करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए भी व्यवस्था स्पष्ट की है। ऐसे मामलों में टैक्सपेयर्स से बकाया राशि की रिकवरी के साथ ब्याज और अनुपातिक पेनल्टी ली जाएगी। हालांकि, ऐसे मामलों में पेनल्टी के अलावा अतिरिक्त कड़ी कार्रवाई नहीं किए जाने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
57वीं GST काउंसिल की बैठक में छोटे टैक्सपेयर्स से जुड़े प्रावधानों के अलावा कर्मचारियों के इंश्योरेंस और GST अनुपालन को आसान बनाने से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर भी फैसले लिए गए हैं।