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Parliament Monsoon Session 2026: ‘सड़क नहीं, सदन में हो संघर्ष’… सांसदों को PM मोदी की सीख, हरभजन सिंह ने विपक्ष को भी दिया बड़ा संदेश

NDA MPs meeting with PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हालिया बैठक के बाद सांसद हरभजन सिंह ने संसद की गरिमा, नियमों और सकारात्मक राजनीति पर बड़ा संदेश साझा किया। उन्होंने विपक्ष के संसद परिसर में प्रदर्शन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि असली लड़ाई सदन के भीतर बहस से लड़ी जानी चाहिए।
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Updated: 7 Aug 2026, 2:27 PM IST
Parliament Monsoon Session 2026
Parliament Monsoon Session 2026 : प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद हरभजन सिंह का बयान, संसद की मर्यादा और जिम्मेदारी पर दिया जोर (फोटो सोर्स: ANI)

PM Modi meets NDA MPs: संसद के मानसून सत्र के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एनडीए में शामिल हुए सांसदों से मुलाकात कर उन्हें संसदीय परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारियों को लेकर अहम संदेश दिया। राज्यसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने इस बैठक के अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से संसद की कार्यवाही में अधिक से अधिक भाग लेने, नियमों का पालन करने और जनता के मुद्दों को गरिमा के साथ उठाने की अपील की।

हरभजन सिंह के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद केवल कानून बनाने की जगह नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी संस्था है, जहां हर जनप्रतिनिधि को सीखने और देशहित में सकारात्मक योगदान देने का अवसर मिलता है। उन्होंने सांसदों को सलाह दी कि सदन की कार्यवाही को गंभीरता से समझें और जब भी बोलें, संसदीय नियमों और मर्यादा का पूरा सम्मान करें।

Parliament Monsoon Session 2026: 'कुछ मिनट की मुलाकात भी प्रेरणा देती है'

हरभजन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ हुई मुलाकात उनके लिए बेहद प्रेरणादायक रही। उन्होंने कहा कि पीएम से मिलने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है और उनका मार्गदर्शन हर जनप्रतिनिधि के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ थोड़ी देर बिताने से भी सकारात्मक ऊर्जा और नई सोच मिलती है, जो जनसेवा के लिए प्रेरित करती है।

विपक्ष के प्रदर्शन पर उठाए सवाल

संसद परिसर में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए हरभजन सिंह ने कहा कि यदि किसी मुद्दे पर वास्तविक चिंता है तो उसका सबसे प्रभावी मंच संसद है। उनका कहना था कि केवल बाहर बैठकर विरोध करने से समाधान नहीं निकलेगा। यदि बदलाव लाना है तो सदन के भीतर तथ्यों और तर्कों के साथ चर्चा करनी चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में बहस और संवाद ही सबसे मजबूत माध्यम हैं।

मानसून सत्र में लगातार हंगामे से प्रभावित हो रही कार्यवाही

इस बार मानसून सत्र के दौरान कई मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विषयों पर विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि महत्वपूर्ण विधेयकों और जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद का सुचारु रूप से चलना जरूरी है।

संसदीय मामलों के जानकारों का मानना है कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां सरकार से जवाब मांगना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन इसके साथ-साथ विधायी कार्य और नीति संबंधी बहस भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बार-बार कार्यवाही बाधित होने से जनता से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा प्रभावित होती है।

लोकतंत्र में संवाद की अहम भूमिका

भारतीय संसदीय व्यवस्था में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। सरकार जहां अपनी नीतियों का पक्ष रखती है, वहीं विपक्ष उनसे जुड़े सवाल उठाकर जवाबदेही सुनिश्चित करता है। ऐसे में संसदीय मर्यादा बनाए रखते हुए प्रभावी बहस लोकतंत्र को मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम मानी जाती है।

हरभजन सिंह के बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव तेज है। उनका संदेश इस बात पर जोर देता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका समाधान संवाद, बहस और संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से ही अधिक प्रभावी ढंग से निकाला जा सकता है।

Updated on:
7 Aug 2026, 2:27 PM IST
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