बीमा संशोधन कानून पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। कांग्रेस सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने बीमा संसोधन विधेयक का विरोध किया। उन्होने कहा कि इससे देश की इकोनॉमी विदेशियों के हाथ में चली जाएगी। पढे़ं पूरी खबर...
Parliament winter session: संसद का शीतकालीन सत्र जारी है। गुरुवार को राज्यसभा में बुधवार को ‘सबका बीमा, सबकी सुरक्षा’ (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक 2025 पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य देश में बीमा कवरेज बढ़ाना, नागरिकों के अधिकार मजबूत करना और बीमा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। बाजार खुलने से स्पर्धा बढ़ेगी, विकल्प बढ़ेंगे और बेहतर सेवा व नई तकनीक आएगी।
उन्होंने बताया कि विधेयक बीमा कंपनियों के लिए वन-टाइम रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करता है और बीमित व्यक्ति को उसके अधिकार देता है। सरकार के अनुसार यह देश की जरूरत है। वहीं विपक्ष ने इसे बीमा बाजार को विदेशी कंपनियों के हवाले करने की कवायद बताया। यह विधेयक बीमा अधिनियम 1938, जीवन बीमा निगम अधिनियम 1956 और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम 1999 में संशोधन करता है।
बहस के दौरान कांग्रेस सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने बीमा में सौ फीसदी एफडीआइ का विरोध करते हुए कहा कि इससे देश का अर्थतंत्र विदेशियों के हाथों में चला जाएगा। भाजपा सांसद अरुण सिंह ने इसे पीएम नरेंद्र मोदी के समावेशी विकास दृष्टिकोण का प्रतिबिंब बताया और कहा कि अधिक कंपनियों से स्पर्धा बढ़ेगी। रेखा शर्मा ने बीमा को जरूरत बताते हुए विदेशी निवेश पर भारतीय नियंत्रण की बात कही।
आप सांसद अशोक मित्तल ने इसे विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाला करार दिया। झामुमो सांसद महुआ माजी ने मजदूरों को बीमा दायरे में लाने की मांग की। भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्र ने एफडीआइ बढ़ने से 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य साधने की बात कही। महेश भट्ट ने इसे सामाजिक सुरक्षा का दस्तावेज बताया, जबकि राजद सांसद संजय यादव ने किसानों को वास्तविक सुरक्षा देने और विधेयक को स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की मांग रखी।