केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग की सिफारिश पर हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) बंद कर दी है। इससे राज्य के बजट पर करीब 30% का नकारात्मक असर पड़ने का अनुमान है।
केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) को बंद करने की घोषणा की है। माना जा रहा है कि ताजा घोषणा से राज्य के बजट पर लगभग 30 प्रतिशत बुरा असर पड़ेगा। इस फैसला की हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने आलोचना की है।
आरडीजी बंद किए जाने के वित्तीय प्रभावों का आकलन करने के लिए एक विशेष कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा- 16वें वित्त आयोग के फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने का विकल्प आखिरी कदम है।
सीएम ने कहा कि कोर्ट जाने से पहले, हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे और उनसे आरडीजी बहाल करने का आग्रह करेंगे। उनके पास इसे बहाल करने का अधिकार है।
सीएम सुक्खू ने चेतावनी देते हुए कहा कि आरडीजी बंद करने का फैसला राज्य की वित्तीय स्थिति को बुरी तरह से अस्थिर कर सकता है और इसके सालाना बजट पर काफी हद तक असर डाल सकता है।
जब राज्य सरकार के अपने संसाधनों और केंद्र से मिलने वाले टैक्स के हिस्से के बाद भी राजस्व घाटा रह जाता है, तो केंद्र सरकार उस बचे हुए घाटे को भरने के लिए अतिरिक्त पैसा देती है। इसे रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट कहते हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 275 के तहत दिया जाता है।
भारत सरकार वित्त आयोग की सिफारिश पर यह देती है। 15वें वित्त आयोग ने सिफारिश की थी कि यह ग्रांट धीरे-धीरे कम की जाए और 2025–26 तक लगभग खत्म हो जाए।
वहीं, 16वें वित्त आयोग ने साफ सिफारिश कर दी है कि 2026–27 से रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट पूरी तरह बंद कर दी जाए। जिससे हिमाचल को बड़ा झटका लगा है।
उधर, हिमचाल में विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर पर निशाना साधते हुए सीएम ने कहा- विपक्ष के नेता और बीजेपी विधायकों को राज्य के वित्त पर विशेष प्रेजेंटेशन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया।
सीएम ने कहा- यह अजीब है कि बीजेपी नेता इस मुद्दे पर बयान दे रहे हैं, लेकिन राज्य की वित्तीय स्थिति पर विस्तृत प्रेजेंटेशन में शामिल होने से इनकार कर दिया, जिससे यह साफ हो गया है कि बीजेपी नेताओं की दिलचस्पी सिर्फ राजनीति करने में है, न कि हिमाचल प्रदेश की असली चिंताओं को दूर करने में।
सीएम ने कहा- राज्य के बड़े हित में बीजेपी नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आरडीजी मुद्दे को उठाने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी को राजनीतिक विचारों से ऊपर उठना चाहिए और पीएम से RDG को बहाल करने या राज्य को विशेष अनुदान देने का आग्रह करना चाहिए।
सीएम ने कहा कि राजस्व और खर्च के बीच 7,000 करोड़-8,000 करोड़ रुपये का अंतर है, जिसे अब तक आरजीजी के जरिए पूरा किया जा रहा था। अब राज्य सरकार अपने अधिकारों के लिए राजनीतिक और कानूनी रूप से लड़ेगी।