
Assembly Election Challenge: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव को राजनीतिक हिम्मत को चुनौती दी। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के इस नेता में उत्तर प्रदेश में सीधे चुनावी मुकाबले का सामना करने का साहस नहीं है। सरमा अयोध्या पहुंचे और राम मंदिर के दर्शन किए। उन्होंने भगवान राम का आशीर्वाद लिया। मीडिया से बात करते हुए, सरमा ने कहा कि अखिलेश यादव 2027 के आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने से कतरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव में आगामी यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं है।
असम के मुख्यमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर के अपने दौरे के बारे में 'X' (ट्विटर) पर पोस्ट किया। "असम को विकसित और सुरक्षित रखने के प्रयासों में श्री राम लला का आशीर्वाद हम पर सदैव बना रहे। आज अयोध्या नगरी में मैंने रघुराई से यही प्रार्थना की।" इस बीच, प्रयागराज से उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि समाजवादी पार्टी को 2026 के विधान परिषद चुनावों और 2027 के निर्णायक विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हर मोर्चे पर मात खाएगी।
केशव प्रसाद मौर्य ने पत्रकारों से कहा, "आप समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव के बयान लगातार सुनते रहेंगे। लेकिन 2026 के विधान परिषद चुनाव आ रहे हैं; जब इनके नतीजे आएंगे और फिर 2027 के विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे, तो समाजवादी पार्टी हर मोर्चे पर मात खा जाएगी, और फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाएगा। 2047 तक बीजेपी ही सत्ता में रहेगी।"
इससे पहले अक्टूबर में, 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायक - राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी अमेठी में बीजेपी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हो गए। इस कार्यक्रम के दौरान, बीजेपी यूपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बागी नेताओं का स्वागत करते हुए बताया कि राकेश प्रताप सिंह तीन बार के विधायक हैं, अभय सिंह गोसाईगंज से विधायक हैं, और विनोद चतुर्वेदी जालौन के कालपी से विधायक हैं। चौधरी के अनुसार, इन नेताओं के पास जमीनी स्तर का राजनीतिक अनुभव और सांगठनिक कौशल है।
बीजेपी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इन तीनों विधायकों ने अखिलेश यादव का साथ छोड़ दिया है। चौधरी ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी (SP) के भीतर कई अन्य लोग भी तुष्टीकरण और जाति की राजनीति से घुट रहे हैं और वे पार्टी से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं। यूपी बीजेपी प्रमुख ने आगे कहा कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को राज्य की जनता की मानसिकता को समझने के लिए आत्म-मंथन करने की जरूरत है।