
CJP Protest(Photo-IANS)
CJP: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई को लेकर रविवार को फैसला नहीं हो सका। इस पर पार्टी की लीगल अफेयर्स प्रमुख रत्ना सिंह ने नाराजगी जताते हुए स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की कार्यवाही पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि दोनों की रिहाई से जुड़ी जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद मामले के गुण-दोष पर सुनवाई नहीं की गई। रत्ना सिंह के मुताबिक, पार्टी के प्रतिनिधि सुबह से ही अदालत में मौजूद थे। उन्हें बताया गया था कि सुनवाई दोपहर 12 बजे होगी। उन्होंने दावा किया कि जरूरी वेरिफिकेशन समेत सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं, लेकिन सुनवाई में लगातार देरी हुई।
रत्ना सिंह ने बताया कि स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट दोपहर करीब 1:30 बजे पुलिस स्टेशन पहुंच गए थे, लेकिन शाम 5 बजे तक अदालत में नहीं आए। उनके अनुसार, अदालत पहुंचने के बाद भी मजिस्ट्रेट ने सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत से रिहाई के सवाल पर मामले की डिटेल सुनवाई नहीं की। रत्ना सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यवाही शुरू होने के करीब पांच मिनट बाद मजिस्ट्रेट ने अदालत को बताया कि उन्हें धमकी भरा मैसेज मिला है। इसके बाद सुनवाई का केंद्र वही मैसेज बन गया और दोनों की रिहाई से जुड़ी औपचारिकताओं पर चर्चा पीछे छूट गई। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर निराशा जताई। साथ ही आरोप लगाया कि कार्यवाही में हुई देरी और सुनवाई के तरीके से ऐसा लगा कि मामले को पहले से तय दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा था।
इससे एक दिन पहले CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अदालत से सशर्त जमानत मिली थी। इसके बाद रत्ना सिंह ने खुशी जताई थी और उम्मीद जताई थी कि सौरव दास और आशुतोष रांका को भी रविवार को रिहा कर दिया जाएगा। रत्ना सिंह ने यह भी दोहराया था कि पार्टी का मानना है कि गिरफ्तार किए गए लोगों की गिरफ्तारी गैरकानूनी थी और उन्होंने कोई अपराध नहीं किया।
अभिजीत दीपके को जमानत मिलने के बाद रत्ना सिंह ने कहा था कि पार्टी को उम्मीद है कि सौरव और आशुतोष को भी जल्द राहत मिलेगी। हालांकि, रविवार की कार्यवाही के बाद उनकी रिहाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
Updated on:
18 Oct 2026 08:39 pm
Published on:
18 Oct 2026 08:28 pm
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