Middle East: वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के रणनीतिक तेल भंडार की स्थिति पर राज्यसभा में सरकार की तरफ से बताया गया कि भंडार आपूर्ति संकट के समय अल्प अवधि में बफर का काम करेगा।
Strategic Petroleum Reserve: ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद दुनिया के कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है। भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है। अब भारत की तरफ से इस विषय में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सरकार ने इस विषय में सोमवार को राज्यसभा में बताया कि भारत के रणनीतिक तेल भंडार वर्तमान समय में दो-तिहाई भरे हुए हैं। आपूर्ति संकट के समय यह अल्प अवधि के लिए बफर का काम कर सकते हैं।
एक लिखित सवाल के जवाब में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री ने राज्यसभा को बताया कि एक विशेष प्रायोजित कंपनी, इंडियन स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिज़र्व (ISPRL) के माध्यम से 53.3 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के भंडारण के लिए आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तीन स्थानों पर रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार स्थापित किए गए हैं। ये वर्तमान स्थिति में आपूर्ति संकट के समय अल्प अवधि के लिए बफर का काम करेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि बाजार की परिस्थितियों के अनुसार भंडारण की मात्रा बदलती रहती है। वर्तमान समय में ISPRL के पास कुल 33.72 मीट्रिक टन का भंडार है, जो कुल भंडारण का 64 प्रतिशत है।
आपको यह जानना महत्वपूर्ण है कि भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के साथ ही नए आपूर्तिकर्ताओं जैसे नाइजीरिया, अंगोला, कनाडा, कोलंबिया, ब्राजील और मैक्सिको समेत कुल 41 देशों से कच्चा तेल आयात करता है।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव का असर भारत पर भी पड़ रहा है। सरकार ने इस विषय पर चर्चा के लिए 25 मार्च को शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 24 मार्च को राज्यसभा में चल रहे संघर्ष और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के कई पहलुओं पर बयान दे सकते हैं।
एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा को संबोधित करते हुए मध्य-पूर्व में हो रहे घटनाक्रमों और उनके भारत पर संभावित प्रभाव के बारे में सदस्यों को जानकारी दी। उन्होंने स्थिति को 'चिंताजनक' बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा संघर्ष अभूतपूर्व चुनौतियां पेश करता है, जो न केवल आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित हैं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी गंभीर हैं।