नोएडा में सुपरटेक के ट्विन टावरों को निर्माण संबंधी प्रावधानों का पालन नहीं करने के चलते सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गिरा दिया गया। भ्रष्टाचार के इस गगनचुंबी इमारत को अधिकारियों और बिल्डर की मिलीभगत से खड़ा किया गया था। इस इमारत को गिराने में जहां करोड़ो खर्च किए गए हैं वहीं इन टावरों को बेचकर करोड़ों की कमाई होने वली है। चलिए जानते हैं टावरों में आए खर्चों और कमाई का हिसाब किताब।
नोएडा के सेक्टर 93A में बने सुपरटेक के अवैध ट्विन टावर रविवार को ढहा दिए गए। पहले सियान, फिर एपेक्स टावर में विस्फोट हुआ। इस प्रक्रिया में इस्तेमाल की गयी विस्फोटक सामग्री के धमाके से किसी तरह के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। वहीं इन इमारतों को लेकर तमाम सवाल लोगों के मन में उठ रहे हैं। इनमें से एक है कि इन्हें ध्वस्त करने में कितना खर्च आया, तो दूसरा की आखिर इमारतों के मलबे का क्या होगा? एक्सपर्ट बता रहे हैं कि ट्विन का मलबा खरीदने वाला मालामाल हो जाएगा।
बताया जा रहा है करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस इमारत को गिराने में भी करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं। ट्विन टावर को जमींदोज करने के लिए 3700 किलोग्राम बारूद का इस्तेमाल किया गया। दोनों टावर को गिराने में करीब 20 करोड़ रुपये का खर्च आया है। दोनों टावर को गिराने में करीब 20 करोड़ रुपये का खर्च आया है। बताया जा रहा है कि कुल लागत में से बिल्डर कंपनी सुपरटेक लगभग 5 करोड़ रुपये का भुगतान कर रही है। वहीं, बाकी के 15 करोड़ रुपये की राशि मलबे को बेचकर प्राप्त की जाएगी।
नोएडा प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रितु माहेश्वरी ने बताया कि करीब 60 हजार टन मलबा दोनों टावर से निकलेगा। अभी यह कहना मुश्किल है कि इमारतों में कितना टन लोहा और अन्य धातू लगे है। ब्लास्ट होने के बाद लोहे के छोटे-छोटे टुकड़े हो गए होंगे। और मलबे में मिक्स हो गए होंगे। वहीं इन्हें इस मलबे से अलग कर पाना थोड़ा मुश्किल होगा। मगर अनुमान लगाया गया है कि 7000 टन के करीब लोहा निकल सकता है। अगर हिसाब लगाया जाए तो 7000 टन लोहे की कीमत 55 रुपए/किलो के हिसाब से 38 करोड़ होगी।
मलबा जरूरत के अनुसार बिकता है, बिल्डर इसे गड्ढे भरने में इस्तेमाल करते हैं। अगर औसतन 500 रुपये प्रति ट्राली मलबे की कीमत आंकी जाए तो इसकी कीमत कई करोड़ रुपये तक जा सकती है। ट्विन टावर का मलबा हटाने में करीब 3 महीने का वक्त लगेगा। लगभग 1200 से 1300 ट्रक लोड करके मलबे को साइट से बाहर निकाला जाएगा। इस तरह जो कंपनी मलबा खरीदती है, वह करोड़ों रुपये कमा सकता है।
यह भी पढ़ें: ट्विन टावर को गिराने में जिस विस्फोटक का हुआ इस्तेमाल वो 3 अग्नि, 12 ब्रह्मोस मिसाइलों के बराबर है