
TMC के बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय (फाइल फोटो - आईएएनएस)
Sudip Bandyopadhyay on TMC NCPI Merger: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सियासी संकट के बीच बागी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय एक बार फिर अपने फैसले का बचाव करते नजर आए हैं। एनसीपीआई (नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया) में विलय करने वाले सांसदों में शामिल सुदीप ने कहा कि 20 सांसदों का यह कदम संविधान के दायरे में है और यदि विवाद अदालत तक पहुंचता है तो वहीं तय होगा कि असली तृणमूल कांग्रेस कौन है।
कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि कौन क्या कह रहा है इस पर चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि जो होना है वह हो रहा है और 20 सांसद एक पार्टी में विलय कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जुलाई में संसद का सत्र शुरू होगा और यदि मामला अदालत में जाता है तो कोर्ट ही तय करेगी कि असली तृणमूल कौन है और कौन नहीं। इस पूरे विवाद की तुलना महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम से भी की है।
इससे पहले भी सुदीप बंदोपाध्याय ने 20 सांसदों के एनसीपीआई में विलय को लेकर कहा था कि इसे विश्वासघात नहीं कहा जा सकता है। उनके मुताबिक लोकसभा में उनके साथ कुल 20 सांसद हैं और संविधान दो-तिहाई सांसदों के समर्थन से होने वाले विलय की अनुमति देता है।
उन्होंने कहा था कि यदि किसी दल के दो-तिहाई से कम सदस्य पार्टी छोड़ते हैं तो उसे दल-बदल या विश्वासघात कहा जा सकता है लेकिन मौजूदा मामले में ऐसा नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने अपने कदम को संवैधानिक बताया था।
टीएमसी में बगावत का मामला तब चर्चा में आया जब पार्टी के 20 सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का फैसला किया। बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सदन में अलग बैठने की मांग भी रखी थी।
बागी खेमे की नेता काकोली घोष दस्तिदार ने दावा किया था कि उनके साथ टीएमसी के दो-तिहाई से अधिक सांसद हैं और इसलिए यह विलय संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत वैध है। उन्होंने यह भी कहा था कि भविष्य में यह समूह एनडीए के साथ मिलकर काम करेगा।
विलय के बाद अब राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर लड़ाई तेज होती दिख रही है। बागी सांसद खुद को 'असली टीएमसी' बता रहे हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व इस दावे का विरोध कर रहा है। इसी बीच सुदीप बंदोपाध्याय ने अपने बयां साफ कहा है कि अंतिम फैसला अदालत करेगी और महाराष्ट्र की तरह इस विवाद का समाधान भी कानूनी प्रक्रिया के जरिए होगा।
Updated on:
16 Jun 2026 09:28 pm
Published on:
16 Jun 2026 09:11 pm
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