
भाजपा सांसद मनोज तिवारी और जनसुराज विधायक प्रशांत किशोर
Prashant Kishor vs Manoj Tiwari: जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधानसभा सीट से नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर और बीजेपी सांसद मनोज तिवारी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। शिष्टाचार, सांस्कृतिक मूल्यों और अहंकार को लेकर मनोज तिवारी के बयान का जवाब देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्हें मनोज तिवारी से किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है।
मनोज तिवारी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि मनोज तिवारी मूल रूप से एक गायक हैं और उन्हें अपना पूरा ध्यान गाना गाने पर लगाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मनोज तिवारी को उस निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करना चाहिए जहां से वे बीजेपी के समर्थन से सांसद चुने गए थे और वहां के लोगों की भलाई के लिए काम करना चाहिए। प्रशांत किशोर कहा कि मनोज तिवारी को बिहार में अनावश्यक और आधारहीन राजनीति में शामिल होने से बचना चाहिए, क्योंकि राज्य के लोगों ने न तो उन्हें अतीत में स्वीकार किया है और न ही भविष्य में करेंगे।
शनिवार को पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए मनोज तिवारी ने बांकीपुर चुनाव नतीजों के बाद प्रशांत किशोर द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताई थी। मनोज तिवारी ने कहा था कि चुनाव जीतने के बाद जो व्यक्ति विनम्र रहता है, उसे संस्कारी माना जाता है, जबकि जीत के बाद अभद्र भाषा या अपशब्दों का इस्तेमाल करने वाले को अहंकारी समझा जाता है।
प्रशांत किशोर ने दूसरे मुद्दों पर भी अपनी प्रतिक्रिया सी। पटना के गर्दनीबाग में PhD छात्रों और शिक्षक अभ्यर्थियों की भूख हड़ताल के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी है और जरूरत पड़ने पर वे उम्मीदवारों से मिलने जरूर जाएंगे। शहरी विकास विभाग और स्थानीय निकायों से जुड़े कथित 'डस्टबिन घोटाले' उन्होंने मीडिया रिपोर्टों का जिक्र किया जिनमें दावा किया गया था कि सस्ते डस्टबिन बहुत ज्यादा कीमतों पर खरीदे गए थे। हालांकि, उन्होंने कहा कि वे पक्की जानकारी मिलने के बाद ही इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान देंगे।
इससे पहले, बांकीपुर में एक कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव के बाद राज्य में सकारात्मक बदलाव शुरू हो गया है और जन सुराज पार्टी का मुख्य एजेंडा शिक्षा और रोजगार के क्षेत्रों में बड़ा बदलाव लाना है। उन्होंने बताया कि राज्य में एक व्यापक व्यवस्था बनाने के साथ-साथ पढ़े-लिखे युवाओं के लिए निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने अपना यह संकल्प दोहराया कि अगर वे अगले दो वर्षों के भीतर तय मानकों के अनुसार शिक्षा और रोजगार के ठोस अवसर उपलब्ध कराने में विफल रहते हैं, तो वे भविष्य में जनता से वोट नहीं मांगेंगे।
Updated on:
16 Aug 2026 09:38 pm
Published on:
16 Aug 2026 09:35 pm
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