प्रतीक जैन वो शख्स हैं जिनके घर ईडी की कार्रवाई पर ममता बनर्जी भड़क गईं। कोयला घोटाले से जुड़े मामले में ईडी ने कोलकाता में छापेमारी की, जिसके बाद बंगाल की राजनीति गरमा गई।
हाल में कोलकाता में कोयला घोटाले से जुड़े मामले की जांच के लिए ईडी ने छापेमारी की। इसके बाद से बंगाल की राजनीति में एक भूचाल सा आ गया।
ममता बनर्जी ने ईडी के खिलाफ खुद मोर्चा संभाला और प्रतीक जैन नाम के जिस शख्स के घर ईडी की कार्रवाई चल रही थी वहां पहुंच गईं। ऐसे में सवाल उठता है आखिर प्रतीक जैन कौन हैं। जिनके लिए बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ईडी से भिड़ गईं।
झारखंड में जन्मे प्रतीक जैन आइआइटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग कर चुके हैं। 2012 में इंजीनियरिंग करने के बाद प्रतीक ने डेलॉयट कंपनी में बतौर एनालिस्ट काम किया।
इसके बाद वह सिटिजंस फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस के संस्थापक सदस्य बनें। इसके बाद 2015 में प्रतीक ने अपने मित्र विनेश चंदेल और ऋषि राज सिंह के साथ मिल कर आई-पैक की स्थापना की जिसमें प्रशांत किशोर भी जुड़े थे। प्रतीक जैन अब तृणमूल कांग्रेस के आइटी सेल के मुखिया भी हैं।
आई-पैक के को-फाउंडर और डॉयरेक्टर प्रतीक जैन हैं। इस कंपनी में अभी 200 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। इसका मुख्यालय हैदराबाद, तेलंगाना में है। यह कंपनी कैंपेन मैनेजमेंट, पॉलिटिकल कंसल्ंिटग, डिजिटल कम्यूनिकेशन, मीडिया रिलेशन, स्ट्रैटेजकि रिसर्च, सोशल मीडिया मार्केटिंग, डेटा एनलिटिक्स जैसे काम करती है।
प्रतीक जैन की फर्म आई-पैक 2019 से तृणमूल कांग्रेस के लिए काम कर रही है। इसका आफिस सॉल्ट लेक सेक्टर-5 में है। जहां ईडी की टीम ने छापा मारा था।
इसके अलावा लाउडन स्ट्रीट में प्रतीक के घर पर भी ईडी पहुंची थी। मौजूदा समय में वह टीएमसी के एक अहम रणनीतिकार भी हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव, फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंन टीएमसी के लिए काम किया।
2013 में जब भाजपा ने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया तब उनके कैंपेन चलाने वाली टीम में प्रशांत किशोर के साथ प्रतीक जैन भी थे।
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के वार रूम में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि उस समय वह कम चर्चित रहे। बाद में वह प्रशांत किशोर से अलग हो गए।