राष्ट्रीय

संविधान के चित्रकार नंदलाल बोस के परिवार के सदस्यों का नाम वोटर लिस्ट से गायब, दस्तावेज जमा करने के बावजूद नाम कटा

संविधान के मूल प्रति के चित्रकार नंदलाल बोस के परिवार का नाम वोटर लिस्ट से कट गया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकील मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी। पढ़ें पूरी खबर...

2 min read
Apr 07, 2026
नंदलाल बोस (फोटो- वीकिपीडिया)

भारत के संविधान की मूल प्रति को चित्रित करने वाले पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस के परिवार के सदस्यों का नाम SIR के बाद वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष रखते हुए TMC की राज्यसभा सांसद व सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने दलील दी है।

ये भी पढ़ें

Bengal Elections: चुनाव आयोग ने उठाया बड़ा कदम, चप्पे-चप्पे पर होगी पुलिस, एमपी, यूपी और बिहार से आएंगे 3000 पुलिस कर्मी

शांतिनिकेतन में रहता है बोस का परिवार

मेनका ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बोस का परिवार दशकों से बोलपुर स्थित शांतिनिकेतन में बसा हुआ है। जिन्हें बिना पर्याप्त कारण के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची से हटा दिया गया। सीनियर एडवोकेट ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नंदलाल बोस (1882-1966) तक आधुनिक भारतीय कला के प्रमुख हस्ताक्षर थे। बोस ने रविंद्र नाथ टेगौर के अनुरोध पर शांति निकेतन में कला भवन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

CJI की खंडपीठ के सामने पेश की दलीलें

सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत, न्यायमूर्ति जोयमल्या बागची और न्यायमूर्ति विपिन एम. पांचोली की खंडपीठ के सामने दलील पेश करते हुए कहा कि बोस के पोते सुप्रबुद्ध सेन (88 वर्ष) का परिवार शांतिनिकेतन में पीढ़ियों से रह रहा है। फिर भी उनके नाम 1 अप्रैल को जारी डिलीशन लिस्ट में हटा दिए गए। मेनका ने कहा कि परिवार ने SIR की प्रक्रिया में पूरी तरह से भाग लिया।

मेनका ने कहा कि बोस के पोते सुप्रबुद्ध सेन का परिवार शांतिनिकेतन में सालों से रह रहा है। नंदलाल के परिवारवालों ने कहा कि दादा के कारण ही हम संविधान का चित्रण देख पाते हैं, फिर भी हमारे नाम SIR के तहत हटा दिए गए। गुरुस्वामी ने SC में दलील दी कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया की कमी को दर्शाता है।

राजेंद्र प्रसाद ने संविधान के हस्तलिखित प्रति को सजाने की जिम्मेदारी दी थी

संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें संविधान की मूल हस्तलिखित प्रति को सजाने और चित्रित करने का दायित्व सौंपा था। बोस और उनकी टीम (जिसमें उनके छात्र भी शामिल थे) ने स्वदेशी शैलियों, सोने की पत्ती और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर 22 चित्र बनाए। इन चित्रों में भारतीय इतिहास, संस्कृति, गांधीजी की दांडी यात्रा, ग्रामीण जीवन और प्राचीन परंपराएं दर्शाई गई हैं। ये चित्र संविधान को मात्र कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान प्रदान करते हैं। 1967 में भारतीय डाक विभाग ने बोस को सम्मानित करते हुए उनके नाम पर डाक टिकट जारी किया था।

SIR के तहत 90 लाख नाम हटाए गए

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच वोटर लिस्ट को लेकर नया अपडेट आ गया है। चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा और अहम डेटा जारी किया है। इस बार खास बात यह रही कि आयोग ने पहली बार जिलावार तरीके से नाम जोड़ने और हटाने की पूरी जानकारी सार्वजनिक की है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर काफी बड़ी और जटिल दिखती है। आयोग के मुताबिक, अब तक कुल 90.66 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। यह बड़ा डेटा माना जा रहा है।

Also Read
View All