भारत में साल 2026 की गर्मी सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। दिल्ली, जयपुर, भोपाल समेत कई शहरों में तापमान 30-36°C तक पहुंच सकता है। IMD के अनुसार मार्च-जून में हीटवेव की तीव्रता और अवधि बढ़ सकती है, मानसून कमजोर होने का भी खतरा। जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के प्रभाव से मौसम असामान्य रहेगा।
Summer forecast India: भारत में साल 2026 की गर्मी (मार्च-जून) सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। पिछले सालों के मौसम ट्रेंड और ताजा अध्ययन के अनुसार साल 2026 में देश के अधिकांश हिस्सों में दिन और रात में तापमान ऊंचा रहेगा तथा हीटवेव की अवधि और तीव्रता बढ़ सकती है। इसका असर फरवरी में कम हुए शीतलहर दिनों में अचानक गर्मी बढ़ने से सामने आ चुका है।
देश की राजधानी दिल्ली समेत कई प्रमुख शहरों का तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है और मार्च और अप्रेल में ही गर्मी के तेवर तीखे होने की संभावना है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण फरवरी में अचानक सर्दी का गायब होकर सीधे गर्मी आ गई। न्यूनतम और अधिकतम तापमान क्रमिक रूप से बढ़ रहा है। इन संकेतों के अनुसार के अनुसार मार्च-अप्रेल में तापमान सामान्य से थोड़ा ऊपर रहेगा, जबकि मई-जून में उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में हीटवेव की फ्रीक्वेंसी बढ़ सकती है। कुछ राज्यों में सामान्य (4-7 दिन) से ज्यादा 6-10 हीटवेव के दिन हो सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में हीटवेव की फ्रीक्वेंसी, तीव्रता और अवधि लगातार बढ़ रही है। पिछले कुछ गर्म सालों में भारत ने लगातार रिकॉर्ड तोड़े हैं, जो जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। IMD के अनुसार 1901 से रिकॉर्ड शुरू होने के बाद सबसे गर्म साल मुख्य रूप से हाल के दशकों में आए हैं। अल नीनो का प्रभाव के कारण 2016-2025 दशक अब तक का सबसे गर्म दशक रहा। इसमें 2025 आठवां सबसे गर्म साल रहा। बीते दशक में 2024 में लंबी हीटवेव और 50 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान राजस्थान में रिकॉर्ड किया गया था।
दिल्ली : 31 डिग्री सेल्सियस
जयपुर: 30डिग्री सेल्सियस
भोपाल: 33डिग्री सेल्सियस
लखनऊ: 31डिग्री सेल्सियस
चंडीगढ़: 29डिग्री सेल्सियस
हैदराबाद: 33 डिग्री सेल्सियस
बेंगलूरु: 32 डिग्री सेल्सियस
मुंबई: 30 डिग्री सेल्सियस
अहमदाबाद:36 डिग्री सेल्सियस
प्रशांत महासागर में नमक के प्रभाव से अल नीनो मजबूत हो सकता है और इसका प्रभाव भारत के आगामी मानसून पर पड़ सकता है। प्रशांत महासागर में नमक के पैटर्न पर किए गए नए शोध में भारत में मानसून के कमजोर रहने की संभावना जताई गई है। जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स जर्नल में प्रकाशित ड्यूक यूनिवर्सिटी के निकोलस स्कूल ऑफ द एनवायरनमेंट के शोध के अनुसार प्रशांत महासागर में खारेपन का खास पैटर्न अल नीनो की तीव्रता को लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं और अत्यधिक अल नीनो घटनाओं को दोगुना कर सकते हैं। इससे भारत में मानसून कमजोर हो सकता है, सूखा पड़ सकता है और जल संकट गहरा सकता है। महासागरीय धाराएं नमकीन या मीठे पानी की धाराएं अल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं को प्रभावित कर सकती है।
दो नए कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से हिमालयी रेंज के जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के अलग-अलग भागों में 26 फरवरी से 3 मार्च तक हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है। पंजाब व हिमाचल में 40 किमी प्रति घंटा तक तेज हवाएं, गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि और घने कोहरे का मौसम हो सकता है। वहीं उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों के दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा और अगले सात दिन तक क्रमिक रूप से 3 से 4 डिग्री तापमान बढ़ेगा। यहां अधिकतम तापमान 30-35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।