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‘महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं, लेकिन तरीका गलत है’, खरगे का सरकार पर हमला, विपक्ष ने दिखाई एकजुटता

Mallikarjun Kharge on Women Reservation Bill: महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि वे आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिल लाने का तरीका गलत है।

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भारत

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Rahul Yadav

Apr 15, 2026

Mallikarjun Kharge Women Reservation Statement

Mallikarjun Kharge Women Reservation Statement (Photo: IANS)

Mallikarjun Kharge Women Reservation Statement: महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्षी दलों की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने साफ कहा कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार जिस तरीके से यह बिल ला रही है, उस पर गंभीर आपत्ति है। उन्होंने इसे 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' कदम बताया।

हम आरक्षण के पक्ष में, लेकिन तरीका गलत

बैठक के बाद खरगे ने कहा, “हम सभी महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन जिस तरह से सरकार इसे ला रही है, उस पर हमें आपत्ति है। यह राजनीतिक मकसद से किया जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार महिला आरक्षण का समर्थन करते आए हैं, लेकिन सरकार इस मुद्दे को डिलिमिटेशन और अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं के साथ जोड़कर भ्रम पैदा कर रही है।

डिलिमिटेशन बिल पर एकजुट विपक्ष

खरगे ने साफ किया कि सभी विपक्षी दल डिलिमिटेशन बिल के खिलाफ एकजुट हैं। उन्होंने कहा, “हम सबने मिलकर तय किया है कि हम डिलिमिटेशन बिल का विरोध करेंगे।” विपक्ष का आरोप है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर सीटों के पुनर्निर्धारण (डिलिमिटेशन) और अन्य बदलावों के जरिए राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।

राहुल गांधी का भी हमला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “कांग्रेस महिला आरक्षण का पूरी तरह समर्थन करती है। लेकिन सरकार जो प्रस्ताव ला रही है, उसका महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है। यह डिलिमिटेशन और जेरिमैंडरिंग के जरिए सत्ता हासिल करने की कोशिश है।” उन्होंने यह भी कहा कि ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों के हिस्से को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और हिस्सा चोरी नहीं होने दिया जाएगा।

विपक्षी दलों की बड़ी बैठक

खरगे के आवास पर हुई इस बैठक में कई प्रमुख विपक्षी नेता शामिल हुए। इसमें कांग्रेस, डीएमके, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी), आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, सीपीआई, सीपीएम समेत कई दलों के नेता मौजूद रहे। बैठक में महिला आरक्षण, डिलिमिटेशन और लोकसभा सीटों में संभावित बढ़ोतरी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विपक्ष का कहना है कि सरकार इन अलग-अलग मुद्दों को मिलाकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।

सरकार ने भी रखा अपना पक्ष

वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि महिला आरक्षण का कोई भी राजनीतिक दल विरोध नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, “जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ था, तब किसी भी पार्टी ने इसका विरोध नहीं किया था। सभी दल सिद्धांत रूप से इसके समर्थन में हैं।” रिजिजू ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण को और टालना दुखद होगा और देश को अब और इंतजार नहीं करना चाहिए।

16 अप्रैल से संसद के विशेष सत्र की शुरुआत हो रही है, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन और उसके लागू होने की प्रक्रिया पर चर्चा होगी। ऐसे में यह साफ है कि जहां एक तरफ सरकार महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, वहीं विपक्ष उसके तरीके और मंशा पर सवाल उठाते हुए इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से चुनौती देने की तैयारी में है।