
India Air Pollution: भारत में प्रदूषण एक गंभीर स्वास्थ्य और आर्थिक संकट बन चुका है। विभिन्न शोध और रिपोर्टों के अनुसार, वायु प्रदूषण भारत में हर मिनट लगभग 4 लोगों की जान ले लेता है, जिससे देश को भारी मानवीय और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
लांसेट (The Lancet) और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्टों के मुताबिक, भारत में हर साल प्रदूषण के कारण करीब 16 से 17 लाख लोगों की मौत समय से पहले हो जाती है। यह आंकड़ा हर मिनट लगभग 3 से 4 मौतों के बराबर है।
लांसेट (The Lancet) और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्टों के मुताबिक, भारत में हर साल प्रदूषण के कारण करीब 16 से 17 लाख लोगों की मौत समय से पहले हो जाती है। यह आंकड़ा हर मिनट लगभग 3 से 4 मौतों के बराबर है।
हवा में मौजूद खतरनाक कण (जैसे PM2.5 और PM10) फेफड़ों के कैंसर, स्ट्रोक, दिल के दौरे (Heart Attack), और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बनते हैं। प्रदूषण के कारण बच्चों के फेफड़ों का विकास रुक जाता है और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से घटती है। बार-बार दी गई चेतावनियों और आपातकालीन उपायों के बावजूद, भारत वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
प्रदूषण केवल स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की कमर भी तोड़ रहा है। विश्व बैंक और अन्य आर्थिक अध्ययनों के अनुसार, प्रदूषण के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और मौतों से भारत को अपनी जीडीपी का लगभग 1.3% से 8.5% तक का नुकसान उठाना पड़ता है।
बीमारियों के कारण लोग काम पर नहीं जा पाते, जिससे श्रम उत्पादकता घटती है।
प्रदूषण जनित बीमारियों के इलाज पर परिवारों और सरकार को हर साल अरबों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जिससे विकास कार्यों के लिए बजट कम हो जाता है।