INDIA bloc leadership: विधानसभा चुनाव से पहले INDIA गठबंधन के नेतृत्व पर विवाद बढ़ा। मणिशंकर अय्यर और कार्ति चिदंबरम ने राहुल गांधी की जगह ममता बनर्जी को आगे करने की सलाह दी।
INDIA bloc leadership: देश के पांच राज्यों में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले एक बार इंडिया महागठबंधन के नेतृत्व को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। हालांकि इस बार कांग्रेस के अंदर से नेतृत्व को लेकर चर्चा हुई है। कांग्रेस के दो नेताओं ने राहुल गांधी की जगह किसी अन्य नेता को गठबंधन का नेतृत्व करने की सलाह दी है। दरअसल, नेताओं का मानना है कि जब भी लोकसभा चुनाव की बात आती है तो गठबंधन की याद आती है, लेकिन विधानसभा चुनाव में सब अलग-अलग हो जाते हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को INDIA गठबंधन को लेकर सलाह दी है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को INDIA गठबंधन का नेता बताया। उनका कहना है कि ममता बनर्जी के बिना INDIA bloc का अस्तित्व खत्म हो सकता है।
अय्यर ने कहा कि गठबंधन का नेतृत्व छोटे दलों के नेताओं—जैसे एम. के. स्टालिन, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव या तेजस्वी यादव—को करना चाहिए और राहुल गांधी को यह जिम्मेदारी उन्हें सौंप देनी चाहिए। यह बयान उन्होंने NDTV से बातचीत में दिया।
हालांकि इससे कुछ दिन पहले अय्यर ने कहा था कि वह राहुलियन नहीं हैं, क्योंकि राहुल गांधी उनसे उम्र में काफी छोटे हैं और उनके राजनीतिक जीवन से दूर रहे हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के बाद पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने भी सलाह दी है। कार्ति चिदंबरम की सलाह तो सीधे-सीधे राहुल गांधी के खिलाफ मानी जा रही है।
गठबंधन के नेता को लेकर चिदंबरम ने कहा कि हर साल यह रोटेशन के आधार पर बदलना चाहिए था। उन्होंने आगे कहा कि मेरी नजर में नीतीश कुमार संयोजक थे, तो पहले उन्हें मौका मिलना चाहिए था। इसके बाद ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे और एमके स्टालिन संयोजक हो सकते थे।
बता दें कि शुरुआत में इंडिया ब्लॉक के संस्थापक नीतीश कुमार को भी उसका नेता नहीं माना गया। माना जाता है कि यही वजह थी कि वे फिर से एनडीए में लौट गए। अगस्त 2022 में उन्होंने एनडीए छोड़ा था ताकि विपक्ष को एकजुट किया जा सके।
लालू यादव के साथ हाथ मिलाने के बाद भी नीतीश कुमार को कांग्रेस की मंजूरी के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। पहले कांग्रेस के संगठन चुनाव की वजह से बात टलती रही, और बाद में भी कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका।
शुरुआत में ममता बनर्जी ने नीतीश कुमार की पहल में रुचि दिखाई थी। लेकिन जब संयोजक बनाने की बात आई, तो उन्होंने अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर प्रधानमंत्री पद के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम आगे कर दिया। इससे निराश होकर नीतीश कुमार ने पीछे हटने का फैसला किया और अपनी राह अलग कर ली।
बता दें कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी INDIA ब्लॉक के नेतृत्व पर अपनी राय दी है।
संजय राउत का कहना है कि यह गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनाव के समय ही सक्रिय होता है, बाकी समय नेताओं के बीच कोई खास बातचीत नहीं होती। उन्होंने कहा कि कोई ममता बनर्जी को नेता बनाने की बात करता है, तो कोई एम. के. स्टालिन का नाम लेता है — लेकिन ये सब नेताओं की निजी राय है।
देश में किसी भी राज्य में विधानसभा चुनाव होते हैं, उससे पहले इंडिया गठबंधन एक बार फिर चर्चाओं में आ जाता है। भले ही विपक्षी दल लोकसभा चुनाव में एकजुट नजर आए हों, लेकिन पिछले कुछ राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में अलग-अलग चुनाव लड़े हैं। हरियाणा और दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने 'एकला चलो' की राह अपनाई थी। यही वजह मानी जा रही है कि इन राज्यों में विपक्षी दल सफल नहीं हो पाए।