अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष जारी है। मीडिल ईस्ट में जारी इस संघर्ष के माहौल में भारत अपने दुश्मन से निपटने के लिए आधुनिक और घातक हमले की तैयारी कर रहा है।
Swarm Drone technology: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष की वजह से पूरी दुनिया का ध्यान मीडिल ईस्ट के क्षेत्र पर है। इस संघर्ष की वजह से मिडिल ईस्ट में पैदा हुए तनाव के बीच भारत अपने दुश्मनों से निपटने के लिए तैयारी कर रहा है। मीडिल ईस्ट के तनावपूर्ण माहौल के बीच भारत अपने आधुनिक हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है। इसमे स्वार्म ड्रोन तकनीकी शामिल है। ये ड्रोन सामान्य ड्रोन से भिन्न होते हैं।
ऐसे ड्रोन को दागने के बाद मेनुअअली ऑपरेट करने की जरूरत नहीं होती है। जब कई ड्रोन को एक साथ तकनीकी की मदद से लॉन्च और संचालित किया जाता है, जो AI या एल्गोरिदम द्वारा नियंत्रित होते हैं। इसे स्वार्म ड्रोन या झुंड ड्रोन कहा जाता है। स्वार्म ड्रोन GPS नेविगेशन सिस्टम से लैस होते हैं। रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए इस प्रकार के ड्रोन ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। ये आधुनिक ड्रोन अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों वाले देशों की ताकत को चुनौती दे सकते हैं। ड्रोन युद्ध के बढ़ते चलन के बीच स्वार्म ड्रोन (झुंड ड्रोन) दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों को चकमा दे रहे हैं।
आधुनिक संघर्ष और दुश्मन क मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत तैयार हो रहा है। अमेरिका, चीन, रूस और यूक्रेन जैसे देश स्वार्म ड्रोन तकनीकी तेजी से विकसित कर रहे हैं। अब भारत भी इस रेस में शामिल हो गया है। ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने के लिए तुर्की द्वारा उपलब्ध कराए गए स्वार्म ड्रोन का इस्तेमाल किया था। अब भारत ऐसे हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने और रक्षा प्रणाली मजबूत करने के लिए तेजी से काम कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) जेट-संचालित हल्के, आधुनिक तकनीकी और तेज गति वाले स्टील्थ मुनिशन ड्रोन विकसित कर रहा है। इन ड्रोन की मारक क्षमता 300-600 किलोमीटर होगी और यह डीप-स्ट्राइक मिशन को अंजाम देने में समर्थ हैं। इन ड्रोनों में रडार से बचने और हवाई रक्षा नेटवर्क में घुसपैठ करने के लिए स्टील्थ विशेषताएं होंगी।
स्वार्म ड्रोन एक साथ कई हमले करने में सक्षम होते हैं। इसके साथ ही यह दुश्मन को चकमा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्वार्म ड्रोन कभी-कभी मिसाइल को घेर लेते हैं, ताकि वायु रक्षा प्रणाली को भ्रमित किया जा सके। इन ड्रोन को एयर डिफेंस सिस्टम का पता लगाने के लिए भी लॉन्च किया जाता है। इसलिए यह सेना के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत ड्रोन तकनीकी की रेस में शामिल हो गया है। अब भारत अपने स्वदेशी स्वदेशी ड्रोन 'शेषनाग-150' पर तेजी से काम कर रहा है। भारत के इस स्वदेशी ड्रोन को कोऑर्डिनेटेड झुंड में हमलों के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे कई ड्रोन दुश्मन के डिफेंस को तोड़कर सटीक हमले कर सकते हैं। भारत के 'शेषनाग-150' ड्रोन की ऑपरेशनल रेंज 1000 किलोमीटर से ज्यादा है।
स्वदेशी तकनीकी से बने यह ड्रोन 5 घंटे से ज्यादा समय तक हवा में रह सकता है। यह टारगेट एरिया के ऊपर मंडरा सकता है, जिससे रियल-टाइम सर्विलांस और हमले के ऑप्शन मिलते हैं। यह बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के दुश्मन के लक्ष्यों की पहचान, ट्रैकिंग और उन पर हमला करने में सक्षम है। ये ड्रोन 25 से 40 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जा सकता है।