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तेल की लड़ाई, पानी तक आई: क्या पश्चिम एशिया में हो जाएगी पेयजल की किल्लत?

ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। ईरान पर US-इजरायल के हमले के बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष का दायर बढ़ गया है। US-इजरायल के हमले के बाद ईरान की जवाबी सैन्य कार्रवाई से इस संघर्ष में तेल और पानी के संयंत्रों को नुकसान पहुंचाया गया है।

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भारत

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Shaitan Prajapat

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Vinay Shakya

Mar 09, 2026

Attacks on Desalination Plant(AI Image)

डीसेलिनेशन प्लांट पर हमला (AI Image)

Attacks on Desalination Plant: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इजरायल और ईरान अब सैन्य ठिकानों पर ही नहीं, बल्कि तेल-पानी के प्लांट को भी निशाना बना रहे हैं। संघर्ष के इस नए स्वरूप से आम लोगों की जिंदगी और अर्थव्यवस्था संकट में है। पहले इजरायल और ईरान ने तेल डिपो और फ्यूल स्टोरेज को निशाना बनाया, लेकिन अब यह संघर्ष पीने के पानी की सप्लाई तक पहुंच गया है। हाल ही में इजरायल ने ईरान के फ्यूल स्टोरेज ठिकानों पर हमले किए, जिससे वहां आग लग गई और आसमान में धुएं के गुबार दिखाई दिए।
मध्य पूर्व में युद्ध के दौरान तेल डिपो और स्टोरेज टैंक हमेशा से रणनीतिक लक्ष्य रहे हैं, क्योंकि ये अर्थव्यवस्था और सैन्य लॉजिस्टिक्स दोनों के लिए बेहद जरूरी हैं। अब ईरान की प्रतिक्रिया ने एक और संवेदनशील क्षेत्र को सामने ला दिया है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में हमले किए, जिनमें सऊदी अरब, UAE, कतर, बहरीन, जॉर्डन, ओमान, कुवैत और इजरायल को निशाना बनाया गया।

डिसेलिनेशन प्लांट पर कितने किया हमला?

हाल ही में ईरान ने दावा किया है कि अमेरिकी हवाई हमले में रणनीतिक होर्मुज स्ट्रेट स्थित केशम द्वीप पर एक डिसेलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया गया। इस हमले को लेकर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि इस हमले से 30 गांवों की जल आपूर्ति बाधित हो गई है। उन्होंने इस हमले को घिनौना अपराध बताया है और अमेरिका को चेतावनी दी है। अरघची ने कहा कि ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला करना एक खतरनाक कदम है, इसके गंभीर परिणाम होंगे। यह मिसाल अमेरिका ने कायम की है, ईरान ने नहीं। अरघची के इस बयान से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि ईरान को गंभीर सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

डीसेलिनेशन प्लांट पर खाड़ी देशों की निर्भरता

खाड़ी देश पेयजल के लिए डीसेलिनेशन प्लांट पर निर्भर हैं। इन प्लांट ने समुद्र के पानी को प्रोसेस करके पीने योग्य बनाया जाता है। इसके अलावा अन्य कार्यों के लिए इन प्लांट से पानी की सप्लाई होती है। दुनिया भर में वॉटर डीसेलिनेशन की क्षमता का 60 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों का है। UAE का 42% पानी डीसेलिनेशन प्लांट से आता है। सऊदी अरब में डीसेलिनेशन प्लांट से 70%, ओमान में 86% और कुवैत में 90% पानी की सप्लाई होती है। फारस कि खाड़ी में 400 से अधिक वॉटर डीसेलिनेशन प्लांट हैं। इनका इस्तेमाल पीने के पानी की सप्लाई करने, इंडस्ट्री को चालू रखने और गोल्फ कोर्स को हरा-भरा रखने जैसे अन्य कार्यों के लिए किया जाता है।

डीसेलिनेशन प्लांट नष्ट होने से किन देशों पर मंडरा रहा खतरा?

डीसेलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचता है तो कतर और बहरीन जैसे देश अधिक प्रभावित होंगे। अगर इन देशों में वॉटर प्लांट को टारगेट किया गया तो हाहाकार मच जाएगा। बता दें कि अधिकांश जल संयंत्र समुद्र के पानी से नमक हटाने के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस प्रणाली का उपयोग करते हैं। इसमें पानी को बेहद महीन झिल्लियों से गुजारकर उद्योग, होटल व अन्य रोजमर्रा के कार्य के लिए तैयार किया जाता है।

जल सुविधाओं पर हमला कानून का उल्लंघन

जल सुविधाओं को निशाना बनाना एक वैश्विक समझौते का भी उल्लंघन है। जिनेवा सम्मेलन सहित अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून, जीवनयापन के लिए जरूरी नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने पर रोक लगाता है। इसमें पेयजल सुविधाएं भी शामिल हैं।