
ईरान ने क़तर में चलाईं मिसाइलें। (फोटो: IANS)
Iran Missiles : दुनिया भर के मुसलमान इस वक़्त रमज़ान के पवित्र महीने में इबादत कर रहे हैं और रोज़े रख रहे हैं। लेकिन, मध्य पूर्व विशेषकर (Middle East Conflict),खाड़ी देशों के आसमान में इस वक़्त शांति नहीं, बल्कि मिसाइलों और फ़ाइटर जेट्स की कानफोड़ू आवाज़ें गूंज रही हैं। इज़रायल, अमेरिका और ईरान की आपसी दुश्मनी अब खाड़ी के दूसरे मुस्लिम देशों को भी अपनी चपेट में ले चुकी है। ताज़ा हालात इतने ख़राब हैं कि क़तर के रक्षा मंत्रालय को अपने एयरस्पेस में ईरान की ओर से दागी गई 12 बैलिस्टिक मिसाइलों (Iran Missiles Qatar) और 17 ड्रोन्स को इंटरसेप्ट कर के (मार कर) गिराना पड़ा है। इस पूरी रस्साकशी ने खाड़ी के सबसे अहम और नाज़ुक हिस्से, वाटर प्लांट्स (समुद्र के खारे पानी को पीने लायक बनाने वाले संयंत्र) पर बड़ा ख़तरा (Gulf Water Crisis) पैदा कर दिया है।
इस्लामी अवधारणा के अनुसार रमज़ान का महीना भाईचारे और शांति का पैग़ाम देता है। अक्सर इस महीने में युद्ध रोक दिए जाते हैं, लेकिन इस बार हालात इसके उलट हैं। क़तर, बहरीन और सऊदी अरब के कुछ हिस्सों में आम नागरिक गहरी दहशत में हैं। इफ़्तार के वक़्त जब परिवार एक साथ बैठते हैं, तो हवाई हमलों के सायरन बजने लगते हैं। लोगों के सामने यह बड़ा संकट है कि वे सुकून से रोज़ा खोलें या मिसाइलों से बचने के लिए बंकरों की तरफ़ भागें।
खाड़ी देशों में पीने के पानी का इकलौता बड़ा ज़रिया ये वाटर प्लांट्स ही हैं। अगर इस युद्ध में कोई एक भटकी हुई मिसाइल भी इन डीसैलिनेशन प्लांट्स पर गिर जाती है, तो लाखों लोगों के सामने पीने के पानी का भयानक संकट खड़ा हो जाएगा। ज़िंदगी की इस लाइफ़लाइन पर मंडराता यह ख़तरा हथियारों की होड़ से भी ज़्यादा ख़ौफ़नाक है।
चंद दिनों बाद ही ईद-उल-फ़ित्र का त्योहार आने वाला है। बाज़ारों में जहां रौनक़ होनी चाहिए थी, वहां अब अनिश्चितता और डर का माहौल है। आसमान में छाई युद्ध की इस धुंध के बीच खाड़ी देशों के लोग इस सवाल से जूझ रहे हैं कि क्या वे इस बार सुरक्षित माहौल में ईद का चांद देख पाएंगे?
खाड़ी के आम नागरिकों का कहना है कि महाशक्तियों की ज़िद ने उनके सबसे पवित्र महीने को दहशत में बदल दिया है। वहीं, क़तर और अन्य मध्य-पूर्वी देशों के नेताओं ने ईरान और अमेरिका-इज़रायल से संयम बरतने की सख़्त अपील की है, ताकि रमज़ान और ईद के दौरान मानवीय संकट को टाला जा सके।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात पर नज़र रखे हुए है कि क़तर के मिसाइलें गिराने के बाद ईरान का अगला क़दम क्या होगा। अमेरिकी और इज़रायली डिफ़ेंस सिस्टम इस वक़्त खाड़ी में हाई अलर्ट पर हैं। कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की कोशिशें तेज़ कर दी गई हैं ताकि ईद से पहले युद्धविराम या तनाव कम किया जा सके।
इस पूरे विवाद का एक बड़ा पहलू यह है कि मुस्लिम देश आपस में ही एक-दूसरे के एयरस्पेस का इस्तेमाल और उल्लंघन कर रहे हैं। ईरान का अपने दुश्मनों को निशाना बनाने के लिए क़तर या अन्य देशों के ऊपर से मिसाइलें दागना, इस बात का सुबूत है कि मध्य-पूर्व की भू-राजनीति में कोई भी देश अब सुरक्षित या 'न्यूट्रल' नहीं रह गया है। ( इनपुट : IANS)
Updated on:
09 Mar 2026 08:30 pm
Published on:
09 Mar 2026 08:29 pm
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