9 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ईरान-इज़राइल युद्ध में ड्रोन की नक़ल का अजब खेल: अमेरिका से ईरान तक तकनीक की कहानी

Drones: मध्य पूर्व में चल रहे ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच युद्ध (Iran Israel War) ने ड्रोन तकनीक (Drones) को एक नया मोड़ दे दिया है। यह सब 2011 में शुरू हुआ जब ईरान ने अमेरिकीसेंटिनल स्टेल्थ ड्रोन ( RQ-170 ) को पकड़ लिया। यह ड्रोन अफगानिस्तान से उड़ान भरकर ईरान की सीमा में […]

2 min read
Google source verification

भारत

image

MI Zahir

Mar 09, 2026

Copyacat Drones in War

ईरान-इज़राइल युद्ध में इस्तेमाल किए जा रहे नकली ड्रोन। (फोटो: AI)

Drones: मध्य पूर्व में चल रहे ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच युद्ध (Iran Israel War) ने ड्रोन तकनीक (Drones) को एक नया मोड़ दे दिया है। यह सब 2011 में शुरू हुआ जब ईरान ने अमेरिकीसेंटिनल स्टेल्थ ड्रोन ( RQ-170 ) को पकड़ लिया। यह ड्रोन अफगानिस्तान से उड़ान भरकर ईरान की सीमा में उतर गया था। ईरान ने दावा किया कि उसने इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से इसे नियंत्रित करके उतारा (Copycat Drones), जबकि अमेरिका ने इसे तकनीकी खराबी बताया। इस घटना ने ड्रोन की दुनिया में एक चेन रिएक्शन शुरू कर दिया। ईरान ने इस अमेरिकी ड्रोन की तकनीक का रिवर्स इंजीनियरिंग किया और अपनी ड्रोन सीरीज बनाई। जैसे शाहेद-171 सिमोर्ग और साएघा, जो उड़ने वाले पंख वाले डिजाइन में RQ-170 से काफी मिलते-जुलते हैं। ये ड्रोन कई लक्ष्यों पर सटीक हमला करने में सक्षम बताए जाते हैं।

यह सस्ता एकतरफा हमला ड्रोन है (Shahed-136)

ईरान की ड्रोन तकनीक की शुरुआत 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध से हुई थी। शुरू में साधारण निगरानी ड्रोन थे, लेकिन बाद में शाहेद-129 जैसे मध्यम ऊंचाई वाले लंबी दूरी के ड्रोन आए, जो इज़राइली हर्मेस 450 से प्रेरित थे। सबसे प्रसिद्ध है शाहेद-136, एक सस्ता कमिकेज़ ड्रोन जो लक्ष्य पर जा कर के फट जाता है। इसकी कीमत बहुत कम है, इसलिए ईरान समर्थित समूह और रूस जैसे देश इसे यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल कर रहे हैं। अब यह नकल का चक्र उल्टा चल पड़ा है। अमेरिका ने ईरान के शाहेद-136 से प्रेरित होकर अपना LUCAS (Low-cost Uncrewed Combat Attack System) बनाया। यह सस्ता एकतरफा हमला ड्रोन है, जिसकी कीमत सिर्फ 35,000 डॉलर है। अमेरिकी कमांडर ने मजाक में कहा कि हमने ईरानी ड्रोन लिया, उसका अध्ययन किया और "मेड इन अमेरिका" लगा कर वापस ईरान पर छोड़ दिया।

अमेरिका-इज़राइल ने ईरान के ठिकानों पर भारी हमले किए

यह "कॉपीकैट ड्रोन" का मल्टीवर्स बन गया है, जहां हर तरफ नकल हो रही है। ईरान की सस्ती ड्रोन से पश्चिमी देशों को महंगे मिसाइल इस्तेमाल करने पड़ रहे हैं, जैसे 20,000 डॉलर के ड्रोन पर 40 लाख डॉलर के पैट्रियट मिसाइल। वर्तमान युद्ध में ड्रोन और मिसाइल हमलों ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया है। ईरान ने खाड़ी देशों, इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन स्वार्म भेजे, जबकि अमेरिका-इज़राइल ने ईरान के ठिकानों पर भारी हमले किए।

सस्ते ड्रोन से महंगे हथियारों को चुनौती मिल रही

इस तकनीकी नकल ने युद्ध को सस्ता और घातक बना दिया है। सस्ते ड्रोन से महंगे हथियारों को चुनौती मिल रही है, जिससे रणनीति बदल रही है। यह युद्ध सिर्फ हथियारों का नहीं, बल्कि तकनीक की नकल और नवाचार का भी है।

युद्ध अब तकनीक की चोरी और नकल का खेल बना

बहरहाल, ड्रोन कॉपीकैट की कहानी देखकर लगता है कि युद्ध अब तकनीक की चोरी और नकल का खेल बन गया है। ईरान ने अमेरिकी तकनीक से सीखा और अब अमेरिका ईरानी ड्रोन कॉपी कर रहा है, मजेदार लेकिन खतरनाक चक्र! इस पूरी कहानी में इज़राइल की भूमिका भी रोचक है, क्योंकि ईरान के कई ड्रोन इज़राइली हर्मेस से प्रेरित हैं। युद्ध में दुश्मन की तकनीक से ही हथियार बनाना एक तरह का आयरनी है।