अमेरिका, रूस और चीन के क्लब में शामिल हुआ भारत। DRDO ने 9 जनवरी 2026 को स्क्रैमजेट इंजन का सफल ग्राउंड टेस्ट पूरा किया। जानें कैसे यह तकनीक ब्रह्मोस-2 और भविष्य की हाइपरसोनिक मिसाइलों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।
Scramjet Engine Test: भारत ने हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल के विकास में एक कदम आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण किया। डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला में फुल स्केल एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट कंबस्टर का 12 मिनट से ज्यादा का ग्राउंड टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस परीक्षण के सफल होने से भारत को हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल और ब्रह्मोस-2 मिसाइल के इंजन के लिए दूसरे देशों की तरफ देखना नहीं होगा। भारत ने पहले छोटी अवधि के स्क्रैमजेट टेस्ट्स किए थे इस बार 12 मिनट के फुल स्केल टेस्ट के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हाइपरसोनिक मिसाइल के लिए जरूरी लंबी दूरी और स्थिरता में सक्षम बनाता है।
इस सफलता से भारत अमेरिका, रूस और चीन के साथ उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जो स्क्रैमजेट तकनीक में 7408 किमी प्रति घंटा की स्पीड वाली मिसाइलें विकसित कर रहे हैं।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, उद्योग भागीदारों और शिक्षाविदों को बधाई दी और कहा-यह उपलब्धि देश के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए एक ठोस आधारशिला है।