राष्ट्रीय

Gen Z ने बदली नौकरी की तस्वीर, 2 साल में दोगुनी हुई हिस्सेदारी, कंपनियों के सामने नई चुनौती- रिपोर्ट

Employees Looking For New Jobs: ‘ग्रेट प्लेस टू वर्क’ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर 2 में से 1 कर्मचारी नई नौकरी तलाश रहा है और 75 प्रतिशत अगले 12 महीनों में कंपनी छोड़ना चाहते हैं।
2 min read
Aug 25, 2026
Gen Z news
(AI Image-ChatGpt)

Great Place To Work India Report: भारत के प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में कर्मचारियों को लंबे समय तक कंपनी से जोड़े रखना लगातार बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ‘ग्रेट प्लेस टू वर्क की नई रिपोर्ट में सामने आया है कि देश में करीब हर दूसरा कर्मचारी सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहा है। वहीं, 75 फीसदी कर्मचारियों का कहना है कि वे अगले 12 महीनों में अपनी मौजूदा कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं। 130 से ज्यादा संगठनों और 1.1 लाख से अधिक कर्मचारियों के बीच किए गए सर्वे पर आधारित इस रिपोर्ट ने भारतीय वर्कफोर्स को लेकर कई अहम संकेत दिए हैं। खास बात यह है कि इसी दौरान प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में जेन Z कर्मचारियों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।

सैलरी से आगे बढ़ी कर्मचारियों की उम्मीदें

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों में सुविधाएं और काम का माहौल पहले की तुलना में बेहतर हुए हैं, लेकिन कर्मचारियों की अपेक्षाएं भी बदल रही हैं। अब सिर्फ अच्छी सैलरी या बेहतर ऑफिस सुविधाएं उन्हें कंपनी में बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कर्मचारी अपने काम की पहचान, करियर में आगे बढ़ने के अवसर, पारदर्शिता और बेहतर वर्क कल्चर को भी उतना ही महत्व दे रहे हैं। रिपोर्ट के संकेत बताते हैं कि कंपनियों के सामने अब कर्मचारियों को सिर्फ भर्ती करने के बजाय उन्हें लंबे समय तक जोड़े रखने की चुनौती ज्यादा बड़ी हो गई है।

दो साल में दोगुनी हुई Gen Z की हिस्सेदारी

रिपोर्ट में प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में जेन Z की बढ़ती हिस्सेदारी को भी महत्वपूर्ण बदलाव बताया गया है। 2023 में जहां वर्कफोर्स में जेन Z कर्मचारियों की हिस्सेदारी 17 फीसदी थी, वहीं अब यह बढ़कर 34 फीसदी हो गई है। यानी महज दो साल में इस पीढ़ी की हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है। इससे कंपनियों के लिए युवा कर्मचारियों की बदलती प्राथमिकताओं और काम को लेकर उनकी अपेक्षाओं को समझना और भी जरूरी हो गया है।

'जितना काम, उतना ही योगदान' का ट्रेंड बढ़ा

रिपोर्ट में कर्मचारियों के व्यवहार में एक और बड़ा बदलाव सामने आया है। कर्मचारी अब अपनी तय जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर अतिरिक्त काम करने के लिए पहले की तरह तैयार नहीं दिख रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी काम नहीं करना चाहते, बल्कि वे अपने काम और निजी जिंदगी के बीच बेहतर संतुलन को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों में कुछ सुधार जरूर हुए हैं, लेकिन ऐसे व्यापक बदलाव अभी नजर नहीं आ रहे हैं जो कर्मचारियों को लंबे समय तक कंपनी के साथ बनाए रख सकें।

जूनियर नहीं, मैनेजर सबसे ज्यादा नौकरी बदलना चाहते हैं

नौकरी बदलने की इच्छा को लेकर मैनेजर और सुपरवाइजर सबसे ज्यादा दबाव में दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 86 फीसदी फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं। इसके मुकाबले व्यक्तिगत योगदान देने वाले कर्मचारियों में नई नौकरी तलाशने वालों की हिस्सेदारी 53 फीसदी है। यह आंकड़ा बताता है कि कर्मचारियों को संभालने और टीमों को लीड करने वाली भूमिका में मौजूद लोग भी नौकरी बदलने को लेकर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

AI का इस्तेमाल बढ़ा, लेकिन कर्मचारियों की तैयारी कम

प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में Artificial Intelligence(AI) का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 60 फीसदी कंपनी अपने रोजमर्रा के कामकाज में AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, टेक्नोलॉजी अपनाने और कर्मचारियों को उसके लिए तैयार करने के बीच अंतर दिखाई देता है। सिर्फ 20 फीसदी कर्मचारियों ने माना कि उन्हें AI टूल्स के फायदे और संभावित जोखिमों के बारे में पर्याप्त जानकारी दी गई है।

Updated on:
25 Aug 2026 05:49 pm
Published on:
25 Aug 2026 05:49 pm