राष्ट्रीय

भारत-म्यांमार सीमा समझौते की आहट, जमीन अदला-बदली के प्रस्ताव पर चर्चा तेज

India Myanmar Land Swap: भारतीय विदेश मंत्रालय की सूचना के अनुसार भारत सरकार देश के 4 राज्यों के नजदीक से गुजर रही म्यांमार सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने को लेकर चर्चा कर रही है।
2 min read
India Myanmar Land Swap
भारत-म्यांमार बॉर्डर पर जमीन के आदान-प्रदान को लेकर चर्चा, photo source@ANI

भारतीय विदेश मंत्रालय ने मणिपुर के पास भारत-म्यांमार सीमा से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद को सुलझाने के लिए जमीन के संभावित आदान-प्रदान (Land Swap) पर बातचीत की प्रक्रिया तेज कर दी है। मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा जारी है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर मणिपुर के कई सिविल सोसाइटी संगठनों ने क्षेत्रीय अखंडता को लेकर चिंता जताई है और इसका विरोध किया है।

विदेश मंत्रालय बोला- अनसुलझे हिस्सों पर बातचीत जारी

मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-म्यांमार सीमा पर कुछ ऐसे हिस्से हैं, जिनका सीमांकन अभी तक नहीं हो पाया है। इन क्षेत्रों को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।

उन्होंने कहा कि भारत और म्यांमार मणिपुर के पास साझा सीमा के उस हिस्से को अंतिम रूप देने के लिए ज़मीन के संभावित आदान-प्रदान पर विचार कर रहे हैं, जहां सीमा अभी तक स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं हुई है।

भारत द्वारा मणिपुर सीमा पर म्यांमार के साथ ज़मीन की अदला-बदली पर विचार किए जाने संबंधी खबरों पर पूछे गए सवाल के जवाब में रणधीर जायसवाल ने कहा कि वह इन खबरों की पुष्टि नहीं कर सकते, लेकिन यह स्वीकार किया कि सीमा के अनसुलझे हिस्सों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।

रिपोर्ट के बाद बढ़ी चर्चा

विदेश मंत्रालय का यह बयान अमेरिकी पत्रिका The Diplomat की हालिया रिपोर्ट के कुछ सप्ताह बाद आया है। 17 जुलाई को प्रकाशित रिपोर्ट में एक आधिकारिक दस्तावेज का हवाला देते हुए दावा किया गया था कि भारत सरकार मणिपुर सीमा पर बॉर्डर पिलर 65 और 68 के बीच सीमांकन (Demarcation) पूरा करने के लिए लगभग 1.4 वर्ग मील क्षेत्र की संभावित अदला-बदली के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

बॉर्डर पिलर 65 और 68 के बीच की दूरी लगभग 2.8 किलोमीटर है। प्रस्तावित क्षेत्र मणिपुर के चंदेल ज़िले में स्थित है, जो म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र की कबाव घाटी से सटा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 26 मई 2026 के एक आधिकारिक दस्तावेज़ में सीमांकन का कार्य तीन महीने के भीतर, यानी अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

171 किलोमीटर सीमा अब भी अनसुलझी

गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत-म्यांमार सीमा के लगभग 1,472 किलोमीटर हिस्से का सीमांकन बॉर्डर पिलर के माध्यम से किया जा चुका है, जबकि करीब 171 किलोमीटर सीमा अब भी अनसुलझी है। यह हिस्सा मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के लोहित सेक्टर और मणिपुर की कबाव घाटी में स्थित है।

Updated on:
05 Aug 2026 07:37 pm
Published on:
05 Aug 2026 07:36 pm