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चुनाव से पहले बीजेपी नेता ने दी जान, मची सनसनी, शहर बंद का आह्वान

Protest : हैदराबाद में नगर निकाय चुनाव से पहले बीजेपी प्रत्याशी की हत्या से तनाव। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने किया उग्र प्रदर्शन, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा।

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चुनाव से पहले बीजेपी नेता ने दी जान

BJP Candidate: तेलंगाना में आगामी नगर निकाय चुनावों (Telangana Municipal Polls) से ठीक पहले राजधानी हैदराबाद राजनीतिक हिंसा की आग में सुलग उठी है। शहर के एक प्रमुख इलाके में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक प्रत्याशी के खुदकुशी (Hyderabad BJP Leader suicide) करने से पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। इलाके में भारी तनाव है और बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है। स्थानीय बीजेपी इकाई ने कल हैदराबाद के कुछ हिस्सों में 'बंद' का आह्वान किया है।

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आखिर क्या है पूरा मामला ?

खबर जंगल की आग की तरह फैली और देखते ही देखते सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक घटनास्थल और अस्पताल के बाहर जमा हो गए। नारायणपेट जिले के मक्तल नगरपालिका के वार्ड 6 से भाजपा उम्मीदवार एरुकाला महादेवप्पा (46) मृत पाए गए। तेलंगाना पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 194 के तहत संदिग्ध मौत का मामला दर्ज किया है।

हैदराबाद में विरोध प्रदर्शन और तनाव

नाराज बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हैदराबाद के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने टायरों में आग लगा कर सड़कें जाम कर दीं और राज्य सरकार के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। गुस्साए समर्थकों का आरोप है कि यह एक 'राजनीतिक साजिश' है और इसके पीछे सत्ताधारी दल के समर्थकों या राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का हाथ है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल (Rapid Action Force) तैनात कर दिया है, ताकि किसी भी तरह की सांप्रदायिक या राजनीतिक हिंसा को रोका जा सके।

पुलिस की कार्रवाई

हैदराबाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और विशेष टीमें (Special Teams) गठित की हैं। पुलिस आयुक्त ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि हमलावरों की पहचान हो सके।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला

इस घटना ने तेलंगाना का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे "लोकतंत्र की हत्या" करार दिया है। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं, अन्य विपक्षी दलों ने भी हिंसा की निंदा की है, लेकिन इसे चुनावी रंजिश का परिणाम बताया है।

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