राष्ट्रीय

भारत सिर्फ गणराज्य नहीं, धर्म से जुड़ी सभ्यता भी – सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court Hearings: बहिष्कार प्रथा, धार्मिक अधिकार और मौलिक अधिकारों के टकराव से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं।

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May 08, 2026
Supreme Court (Photo - ANI)

सबरीमला समेत धार्मिक प्रथाओं और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की नौ जजों की संविधान बेंच में गुरुवार को 13वें दिन धर्म, परंपरा और मौलिक अधिकारों के संतुलन पर व्यापक बहस हुई। सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की टिप्पणी चर्चा के केंद्र में रही। उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ गणराज्य नहीं, बल्कि धर्म से जुड़ी सभ्यता भी है और अदालत को यह तय करते समय बेहद सतर्क रहना होगा कि धार्मिक प्रथाओं की न्यायिक समीक्षा की सीमा क्या हो। बेंच ने दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार की प्रथा, धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक सुधार और व्यक्तिगत गरिमा के अधिकार पर लंबी सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि धार्मिक अधिकारों और व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन तय करना सबसे कठिन संवैधानिक प्रश्नों में से एक बन चुका है।

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अधिवक्ता रामचंद्रन: बहिष्कार का डर लोगों को बोलने से रोकता है। समुदाय से बाहर किए गए व्यक्ति को मस्जिद, कब्रिस्तान और सामाजिक जीवन से वंचित कर दिया जाता है।

जस्टिस नागरत्ना: क्या हर धार्मिक प्रथा को संवैधानिक अदालत में चुनौती दी जा सकती है?

जस्टिस अमानुल्लाहःअगर बहिष्कार का असर सामाजिक और नागरिक अधिकारों पर पड़ता है तो अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।

अधिवक्ता रामचंद्रनः धर्म और सामाजिक सुधार में टकराव हो तो धर्म को पीछे हटना होगा।

जस्टिस नागरत्नाः भारत की सभ्यता की एक स्थायी विशेषता मनुष्य और धर्म का गहरा संबंध है। हम उस स्थायी तत्व को तोड़ नहीं सकते।

अधिवक्ता लूथराः धार्मिक अधिकार मौलिक अधिकारों से ऊपर नहीं हो सकते। संविधान ने खेल के नियम बदल दिए हैं। महिला जननांग विकृति (एफजीएम) सात साल की बच्चियों पर थोपी जाती है और यह कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

जस्टिस बागचीः धर्म की अभिव्यक्ति सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता के अधीन है।

अधिवक्ता पाशा: एफजीएम एक 'प्रतीकात्मक प्रक्रिया' है।

जस्टिस बागची: खतना और एफजीएम में स्पष्ट अंतर है।

अधिवक्ता गुप्ता: अदालत को धार्मिक प्रथाओं की न्यायिक समीक्षा और संवैधानिक नैतिकता के बीच संतुलन बनाना होगा।

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Updated on:
08 May 2026 09:02 am
Published on:
08 May 2026 08:59 am
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