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West Bengal Election Result: ममता की सबसे बड़ी चुनौती अब, TMC का भविष्य को लेकर लग रहे कयास

Mamata Banerjee: टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के सामने पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती है। हार के बाद पार्टी के कई नेताओं ने बगावती सुर अपना लिए हैं। पढ़ें पूरी खबर

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Mamata Banerjee

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी। (फोटो- AI)

पश्चिम बंगाल (West Bengal Election Results) में भाजपा (BJP) ने टीएमसी (TMC) के पंद्रह साल के शासन को उखाड़ फेंका है, लेकिन TMC प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने हार मानने से इनकार कर दिया। ममता ने कहा कि बीजेपी और चुनाव आयोग ने मिलकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान वोटों की लूट की है। इसके साथ ही, ममता ने इंडिया गठबंधन के नेताओं से संपर्क करना शुरू कर दिया है। ममता ने कहा कि वह आजाद पंछी हैं। वह अब फिर से सड़क पर उतरकर केंद्र और राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा करेंगी, लेकिन विशलेषकों का कहना है कि ममता के सामने हार के बाद सबसे बड़ी चुनौती टीएमसी के भविष्य को लेकर है।

कद्दावर चेहरे हार गए

इस बार के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े कद्दावर नेताओं को शिकस्त का सामना करना पड़ा है। चंद्रिमा भट्टाचार्य, शशि पांजा, अरूप बिस्वास, सुजीत बोस और ब्रात्य बसु शामिल है। वहीं, हार के बाद पार्टी में असंतोष की सुगबुहाट भी तेज है। बुधवार को परिणाम आने के दो दिन बाद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने कोलकाता स्थित अपने घर पर विधायकों की मीटिंग बुलाई। करीब 10 विधायक इस मीटिंग से नदारद रहे।

ममता पार्टी को एकजुट रखने की पूरी कोशिश कर रही

एक सीनियर TMC नेता ने दावा किया कि ममता ने उन लोगों को मीटिंग में आने से मना किया था, जिनके इलाके में चुनाव के बाद हिंसा का दौर जारी था। टीएमसी के एक नेता ने कहा कि ममता बनर्जी पार्टी को एकजुट रखने की पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन हमें पक्का नहीं पता कि छह महीने या एक साल बाद हमारे कितने नेता हमारे साथ खड़े रहेंगे।

कूचबिहार, फरक्का में TMC में कलह

कूचबिहार से आने वाले सीनियर टीएमसी नेता रवींद्रनाथ घोष ने अपनी ही पार्टी के दूसरे नेता उदयन गुहा पर हार का ठिकरा फोड़ा। घोष ने कहा कि अगर उदयन गुहा को नहीं हटाया गया, तो TMC कूच बिहार में दोबारा खड़ी नहीं हो पाएगी। ऐसे नेताओं को पार्टी से निकाल देना चाहिए।

फरक्का के पूर्व पार्टी विधायक, मोनिरुल इस्लाम, जिन्हें इस बार टिकट नहीं मिला था, उन्होंने पार्टी के बड़े नेताओं के काम करने के तरीके की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से अभिषेक ने हम जैसे विधायकों का अपमान किया है, उसका नतीजा पूरी पार्टी को भुगतना पड़ रहा है। भले ही भविष्य में तृणमूल बची रहे, लेकिन उनके लिए पार्टी चलाना मुमकिन नहीं है। मैं खुद उनसे कोलकाता में उनके दफ़्तर में मिलने गया था, दो घंटे इंतज़ार किया, लेकिन बिना मिले ही वापस लौटना पड़ा। वह पार्टी विधायकों को अपना जूनियर समझते थे।

अभिषेक बनर्जी पर बोला हमला

मालदा से आने वाले एक अन्य तृणमूल नेता कृष्णेंदु रॉय चौधरी ने अभिषेक बनर्जी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अभिषेक और आईपैक ने इस बार ममता बनर्जी को चुनाव हरा दिया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी से सत्ता दूसरे हाथों में जाने के बाद पार्टी को नुकसान हो रहा है। यह दुख की बात है।

सियासी जानकारों का कहना है कि मुकुल रॉय, सुवेंदु और पार्थ चटर्जी जैसे नेता तृणमूल के लिए स्तंभ की तरह थे। इन्होंने पार्टी के लिए नेटवर्क बनाए, स्थानीय समीकरणों को संभाला और चुनावी जीत सुनिश्चित की। ऐसा लगता है कि अब TMC के भीतर नेतृत्व का एक खालीपन आ गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन की असली परीक्षा आने वाले नगर निकाय और पंचायत चुनावों में होगी।