
Supreme Court (Photo - ANI)
देश में कचरा बढ़ता जा रहा है जो चिंता की स्थिति है, लेकिन उससे भी ज़्यादा चिंताजनक है देश में कचरा प्रबंधन की बदहाल स्थिति और नियमों की अनदेखी। इस वजह से कचरे का सही प्रबंधन नहीं हो पा रहा है जिससे गंदगी और प्रदूषण बढ़ रहा है। इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने वड़ा आदेश दिया है। इस आदेश के अनुसार पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत जिला कलेक्टरों को 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए विशेषाधिकार दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जिला कलेक्टरों को एक 'विशेष प्रकोष्ठ' गठित करने का निर्देश दिया है। यह प्रकोष्ठ नियमों की अवहेलना एवं बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई कर सकेगा। विशेष परिस्थितियों में जिला कलेक्टरों को दोषी संस्थानों की बिजली और पानी की सप्लाई रोकने का आदेश देने का भी अधिकार होगा।
जस्टिस पंकज मित्थल और एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वो अधिनियम की धारा 23 के तहत तत्काल अधिसूचना जारी करे। इसके माध्यम से धारा 5 की शक्तियाँ एक साल की अवधि के लिए जिला कलेक्टरों को हस्तांतरित की जाएंगी। कोर्ट ने संबंधित मंत्रालयों को 24 मई तक एक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इसमें राज्यों और स्थानीय निकायों द्वारा लक्ष्यों की प्राप्ति का प्रतिशत दर्ज होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 25 मई को होगी।
जिला कलेक्टरों को डंपिंग स्थलों का 'वर्चुअल निरीक्षण' करने और हर पखवाड़े (15 दिन में) विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संबंधित राज्य सचिवों को भेजने का निर्देश दिया गया है। प्रभावी कचरा प्रबंधन के लिए 11 बिन्दुओं के निर्देश भी जारी किए गए हैं, जिनका उचित प्रकार से पालन करना ज़रूरी है।
Updated on:
08 May 2026 08:26 am
Published on:
08 May 2026 08:22 am
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