
Screen Addiction India: क्या आपको पता है! भारतीय रोज करीब 141 करोड़ घंटे ऑनलाइन वीडियो देखने में खर्च कर देते हैं। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं है। रील्स और शॉर्ट्स का अंतहीन स्क्रॉल धीरे-धीरे नशे की तरह हमारे समय और ध्यान को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। एक वीडियो खत्म होता है और अगला सामने आ जाता है। हमें लगता है, सिर्फ कुछ सेकंड और देख लेते हैं, लेकिन यही कुछ सेकंड मिलकर करोड़ों घंटे बन जाते हैं। इस पूरे खेल में हमारा समय और ध्यान प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी पूंजी है और इसी ध्यान से सोशल मीडिया कंपनियां अरबों डॉलर का कारोबार कर रही हैं।
भारत में ऑनलाइन वीडियो देखने वालों की संख्या 66.49 करोड़ पहुंच गई है। ओरमैक्स के मुताबिक भारतीय ऑनलाइन वीडियो ऑडियंस औसतन 14.9 घंटे प्रति सप्ताह वीडियो देखती है। इसी आधार पर देश में सालाना करीब 517 अरब घंटे, यानी रोज करीब 141 करोड़ घंटे ऑनलाइन वीडियो देखने में जा रहे हैं। इसमें रील्स के साथ ओटीटी और दूसरे ऑनलाइन वीडियो भी शामिल हैं।
141 करोड़ घंटे को 8 घंटे के कामकाजी दिन में बदलें तो यह करीब 17.6 करोड़ कार्यदिवस रोज के बराबर है। भारत में 453 रुपए की दैनिक कमाई को आधार मानें तो इन घंटों की संभावित आर्थिक कीमत करीब 7,984 करोड़ रुपए रोज और करीब 29.1 लाख करोड़ रुपए सालाना बैठती है। यह वास्तविक आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि समय की संभावित कीमत का अनुमान है।
ऑनलाइन वीडियो की बढ़ती खपत के साथ भारत में कनेक्टेड टीवी ऑडियंस भी एक साल में 60% बढ़कर 20.69 करोड़ हो गई है। पेड ओटीटी सब्सक्रिप्शन 17.26 करोड़ तक पहुंच चुके हैं। दूसरी तरफ, दुनिया में सोशल मीडिया विज्ञापन बाजार 2025 में 117.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया और एक साल में 32.6% बढ़ा। डिजिटल वीडियो विज्ञापन भी 25.4% बढ़कर 78 अरब डॉलर हो गया। यानी दर्शक जितनी देर स्क्रीन पर रहते हैं, उनके ध्यान की कारोबारी कीमत उतनी ही बढ़ती है। मेटा ने 2025 में 196.2 अरब डॉलर का विज्ञापन राजस्व दर्ज किया।
2026 की व्यवस्थित समीक्षा में 42 अध्ययनों और 46,912 युवाओं के आंकड़ों में भारी शॉर्ट-वीडियो इस्तेमाल का कम ध्यान, कम आत्म-नियंत्रण और एडिक्शन लाइक सिम्पटम्स से संबंध मिला। हालांकि शोधकर्ताओं ने कारण-परिणाम को पूरी तरह साबित नहीं माना है।
(सोर्सः ओरमैक्स, जीडब्ल्यूआइ, पीएलएफएस)