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ईरान से 500 भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी: एस जयशंकर ने बताया आर्मेनिया रूट का ‘मास्टरप्लान’

Evacuation: भारत सरकार ने युद्धग्रस्त ईरान से 500 से अधिक भारतीयों को आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित निकाल लिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर की इस कूटनीतिक रणनीति और रैस्क्यू ऑपरेशन की हर तरफ तारीफ हो रही है।

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Mar 16, 2026
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर। ( फाइल फोटो: पत्रिका)

Middle East Crisis : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव (Middle East Crisis) और युद्ध के हालात के बीच भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा बचाव अभियान (Rescue Operation) चलाया है। विदेश मंत्री (Foreign Minister) एस जयशंकर के नेतृत्व में 500 से अधिक भारतीय नागरिकों (Indian Citizens) को ईरान से सुरक्षित निकाल लिया गया है। इस मुश्किल समय में जब सीधे हवाई रास्ते बंद थे, तब आर्मेनिया के रास्ते (Armenia Route) का बड़ी चतुराई से इस्तेमाल किया गया। भारत की इस सटीक कूटनीतिक रणनीति (Strategy) की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। अपनी जान बचाकर सुरक्षित वापस लौटे लोगों के चेहरों पर राहत साफ देखी जा सकती है। सरकार का यह पूरा मिशन बिना किसी शोर-शराबे के बेहद शांति और सुरक्षित तरीके से (Safe Evacuation) पूरा किया गया।

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विदेश मंत्री की कूटनीतिक चाल (Diplomatic Strategy)

जब ईरान में हालात बिगड़ने लगे, तब वहां पढ़ाई और काम करने वाले हजारों भारतीयों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन गई थी। ऐसे में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अपने बेहतरीन कूटनीतिक कौशल का परिचय दिया। उन्होंने ईरान और आर्मेनिया दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों से सीधे बात की। यह तय हुआ कि जब आसमान से उड़ान भरना खतरे से खाली नहीं है, तो लोगों को सड़क के रास्ते आर्मेनिया बॉर्डर तक पहुंचाया जाए। इसके लिए आर्मेनिया ने बिना किसी देरी के 'ग्रीन कॉरिडोर' बना दिया, जिससे भारतीयों को तुरंत सुरक्षित रास्ता मिल सका।

खौफ के बीच कैसे हुआ बचाव (Evacuation Process)

यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। ईरान के अलग-अलग शहरों, जैसे तेहरान और उर्मिया से भारतीय छात्रों और अन्य नागरिकों को बसों के जरिए निकाला गया। घंटों का लंबा सफर तय करके ये लोग आर्मेनिया की सीमा तक पहुंचे। सुरक्षा के लिहाज से दूतावास ने सभी को सख्त हिदायत दी थी कि वे अपनी लाइव लोकेशन इंटरनेट या सोशल मीडिया पर किसी के साथ साझा न करें। आर्मेनिया पहुंचने के बाद वहां से फ्लाइट के जरिए उन्हें दुबई होते हुए सीधे दिल्ली एयरपोर्ट लाया गया।

जनता की प्रतिक्रिया (Public Reactions)

दिल्ली एयरपोर्ट पर कदम रखते ही कई छात्रों और नागरिकों की आंखें खुशी से छलक पड़ीं। जान बचाकर लौटे जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों के मेडिकल छात्रों ने कहा, "हालात इतने खराब थे कि एक पल को लगा था कि हम शायद कभी अपने घर नहीं लौट पाएंगे, लेकिन भारत सरकार ने हमें वहां से निकाल कर चमत्कार कर दिया।" लोगों ने इस त्वरित और सटीक कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय का दिल से धन्यवाद किया है।

यह रहा फालोअप एक्शन (Follow-up Action)

विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह बचाव अभियान अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। ईरान में अभी भी जो भारतीय मौजूद हैं, सरकार उनके और वहां के बदलते हालात पर 24 घंटे नजर बनाए हुए है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास लगातार वहां बचे हुए नागरिकों के संपर्क में है। यह तय किया जा रहा है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो जरूरत पड़ने पर बाकी लोगों को भी इसी सुरक्षित रास्ते से जल्द से जल्द स्वदेश वापस लाया जाएगा।

इस पूरे मामले का वैश्विक प्रभाव (Global Impact)

इस पूरे मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि भारत ने दुनिया को फिर से अपनी ताकत दिखा दी है। संकट चाहे यूक्रेन का हो, सूडान का या फिर अब ईरान का, भारत अपने नागरिकों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। ईरान के साथ भारत के पुराने और मजबूत संबंधों के कारण ही यह रास्ता बिना किसी शर्त के इतनी आसानी से मिल पाया। यह घटना वैश्विक स्तर पर भारत की कूटनीति की एक बहुत बड़ी जीत को दर्शाती है, जहां दोस्ती और बातचीत से बड़े से बड़ा रास्ता निकाला जा सकता है।500 भारतीयों का रेस्क्यू, जानें जयशंकर की सीक्रेट स्ट्रेटेजी

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