India Russia Relations: भारत और रूस ने अपनी सैन्य और रणनीतिक साझेदारी को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। पश्चिमी देशों के दबाव को दरकिनार करते हुए दोनों देश अब रक्षा, अंतरिक्ष और ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े समझौते कर रहे हैं।
Defense Partnership: पश्चिमी देशों और अमेरिका के भारी दबाव के बावजूद, भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसकी विदेश नीति पूरी तरह से स्वतंत्र है। भारत और रूस के बीच रक्षा संबंधों की जड़ें अब और भी गहरी हो रही हैं। हाल ही में दोनों देशों की सेनाओं के बीच 5वीं उप-कार्य समूह (भूमि) की अहम बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय वार्ता का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग, नई रणनीतियों और सैन्य तकनीक को साझा करना था।
भारतीय सेना के अनुसार, यह बैठक भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के बैनर तले आयोजित की गई। इस दौरान दोनों पक्षों ने सैन्य ज्ञान के आदान-प्रदान और अपनी सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की। इससे साफ संकेत मिलता है कि भविष्य में दोनों देशों की रक्षा साझेदारी को कोई भी बाहरी ताकत कमजोर नहीं कर सकती। प्रतिनिधिमंडल ने शत्रुजीत ब्रिगेड का भी दौरा किया, जो यह दर्शाता है कि सैन्य मोर्चे पर दोनों देश एक साथ मिलकर नई संभावनाएं तलाश रहे हैं।
इस साल मई में जब रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भारत आए थे, तब उन्होंने स्पष्ट किया था कि नई दिल्ली और मॉस्को के रिश्ते अब केवल हथियारों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों ने अब अंतरिक्ष अन्वेषण रक्षा उपकरणों के संयुक्त निर्माण और उर्वरकों की आपूर्ति पर भी बड़ा मास्टरप्लान तैयार कर लिया है। ब्रिक्स बैठक के बाद लावरोव ने साफ कहा था कि दोनों देश तीसरे देशों के "शत्रुतापूर्ण दबाव" से अपने आर्थिक और सैन्य संबंधों को बचाने के लिए नए तंत्र विकसित कर रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भी रूस ने भारत की सभी जरूरतों को पूरा करने का भरोसा जताया है।
कूटनीतिक मोर्चे पर एक और बड़ी खबर यह है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सितंबर 2026 में भारत का दौरा करने वाले हैं। क्रेमलिन ने पुष्टि की है कि पुतिन 12 से 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। एक ही साल के भीतर पुतिन का यह दूसरा भारत दौरा होगा, जो कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
बहरहाल,भारत और रूस की इस बढ़ती नजदीकी से पश्चिमी देश, खासकर अमेरिका, असहज महसूस कर रहा है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर एकदम सही दिशा में कदम बढ़ा रहा है। (इनपुट: ANI)