
Sergio Gor on Javelin Missile Defence Deal: दुनिया की सबसे घातक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल जैवलिन (ATGM) जल्द ही भारत में बनेगी। इसको लेकर जैवलिन ज्वाइंट वेंचर और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) के बीच MoU पर हस्ताक्षर हुए हैं। जैवलिन ज्वाइंट वेंचर लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन की साझेदारी है। इस समझौते के तहत भारत में जैवलिन ऑल-अप-राउंड मिसाइलों का सह-उत्पादन किया जाएगा। यह जानकारी भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने मंगलवार को दी।
इस संबंध में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। लॉकहीड मार्टिन, रेथियॉन और टाटा एडवांस्ड के बीच यह सहयोग अमेरिकी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करेगा, अमेरिका के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करेगा और भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देगा।'
लॉकहीड मार्टिन इंडिया ने भी 31 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बताया कि लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन के जैवलिन ज्वाइंट वेंचर ने भारत में जेवलिन मिसाइल बनाने के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ समझौता किया है।
भारत ने 2010 में जेवलिन लेने की कोशिश की थी। उस समय भारतीय सेना के पास करीब 44 हजार एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों (ATGM) की कमी थी। अमेरिका ने 2012 में भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से मना कर दिया था। इसके बाद भारत को अन्य देशों पर निर्भर होना पड़ा। ऐसे में भारतीय सेना फ्रांस की मिलान और रूस की कोंकर्स ATGM पर निर्भर रही।
इसके बाद भारत ने इजरायल से स्पाइक मिसाइलें लीं। वहीं, डीआरडीओ ने स्वदेशी मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) बनाने में सफलता हासिल की। इस मिसाइल के 2015 से 2024 तक कई परीक्षण किए गए। अब यह भारतीय सेना में शामिल होने के लिए तैयार है।
अब सवाल यह है कि अमेरिका एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल जैवलिन भारत को देने के लिए आखिर क्यों राजी हुआ? इसकी संभावित वजहों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करना और भारत की रूस पर रक्षा निर्भरता कम करना शामिल हो सकता है। भारत की 'मेक इन इंडिया' नीति भी इसकी प्रमुख वजहों में से एक मानी जा सकती है।
एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल जैवलिन की रेंज करीब 4 किलोमीटर है और इसका वजन 22.3 किलोग्राम है। इसे मुख्य रूप से टैंक और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने के लिए बनाया गया है।
इसकी सबसे बड़ी खासियत 'फायर एंड फॉरगेट' क्षमता है। यानी मिसाइल दागने के बाद सैनिक को लगातार इसे नियंत्रित करने की जरूरत नहीं होती। जैवलिन टॉप-अटैक मोड में लक्ष्य के ऊपरी हिस्से पर हमला कर सकती है, जो टैंक का अपेक्षाकृत कमजोर हिस्सा होता है।
इसमें इंफ्रारेड सीकर तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिससे यह दिन और रात दोनों समय लक्ष्य को पहचान सकती है। यह एक पोर्टेबल सिस्टम है, जिसे सैनिक आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकते हैं।