शनिवार की रात देशभर में लोगों ने 2026 का पहला सुपर वुल्फ मून देखा।
देशभर में शनिवार की रात सबसे बड़ा चांद यानी सुपरमून (Supermoon) दिखा। यह 2026 का पहला सुपरमून है। गुवाहाटी, भुवनेश्वर, कोलकाता और लखनऊ जैसे शहरों में सूर्यास्त के तुरंत बाद चमकता हुआ चंद्रमा दिखाई दिया। इस सुपरमून को “वुल्फ मून” भी कहा जाता है, जो सामान्य पूर्णिमा की तुलना में अधिक चमकीला और बड़ा नजर आया। इस दौरान पूर्णिमा की तुलना में चांद लगभग 30 प्रतिशत अधिक चमकीला और करीब 14 प्रतिशत बड़ा दिखाई दिया। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए कई लोग बिना किसी विशेष उपकरण के ही घरों से बाहर निकल आए।
खगोल विज्ञान के अनुसार चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर अंडाकार कक्षा में घूमता है, जिस कारण वह कभी पृथ्वी के नज़दीक और कभी दूर होता है। चंद्रमा की पृथ्वी से औसत दूरी लगभग 3.84 लाख किलोमीटर है। इसकी सबसे नज़दीकी दूरी करीब 3.56 लाख किलोमीटर, जबकि सबसे दूर की दूरी लगभग 4.07 लाख किलोमीटर होती है। जब पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 3.56 लाख किलोमीटर की दूरी पर होता है, तो इसे सुपरमून कहा जाता है। इस दौरान चंद्रमा सामान्य पूर्णिमा की तुलना में करीब 14 प्रतिशत बड़ा और लगभग 30 प्रतिशत अधिक चमकीला दिखाई देता है।
आंकड़ों के अनुसार यह खगोलीय स्थिति हर महीने नहीं बनती, इसलिए साल में आमतौर पर 2 से 4 बार ही सुपरमून देखने को मिलता है। खगोलीय इसे वुल्फ मून (Wolf Moon) भी कहा जाता है। वहीं ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार सर्दियों के इस समय भोजन की कमी के कारण जंगलों में भेड़ियों की आवाजें ज्यादा सुनाई देती थीं, इसलिए जनवरी की पूर्णिमा को वुल्फ मून कहा गया।