
भारतीय सेना (Indian Army) ने चीन (China) और पाकिस्तान (Pakistan) से लगती बॉर्डर पर अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों तक हथियार, गोला-बारूद, राशन और अन्य ज़रूरी सामान पहुंचाने के लिए अब एक नया तरीका अपनाने का फैसला लिया है। यह काम अब ड्रोन के ज़रिए किया जाएगा। इसके लिए भारतीय सेना ने 2,715 लॉजिस्टिक ड्रोन्स (Logistic Drones) खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
लॉजिस्टिक ड्रोन्स की खरीद के लिए भारतीय सेना ने रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन जारी किया है। ड्रोन तीन अलग-अलग ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए खरीदे जाएंगे। इनमें 6,000 फीट तक, 6,000 से 12,000 फीट तक और 12,000 से 20,000 फीट तक संचालन करने वाले ड्रोन शामिल होंगे। सबसे ऊंचाई वाले ड्रोन को 19,000 फीट की ऊंचाई से उड़ान भरने और 50 डिग्री सेल्सियस से माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में संचालन करने में सक्षम होना होगा।
प्रत्येक ड्रोन 10 से 20 किलोमीटर की एकतरफा दूरी तक हथियार, गोला-बारूद, राशन और अन्य सामग्री ले जाने में सक्षम होगा। इनमें जीपीएस, भारतीय नेविगेशन प्रणाली नैविक, बाधा पहचान सेंसर, डे-नाइट कैमरे और ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन जैसी आधुनिक प्रणालियाँ होंगी। ड्रोन स्वायत्त, मैनुअल और 'रिटर्न-टू-होम' मोड में संचालित किए जा सकेंगे।
भारतीय सेना की यह पहल 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) के दौरान ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन के व्यापक इस्तेमाल से मिले अनुभवों की वजह से शुरू हुई है। सेना चाहती है कि नए ड्रोन एंटी-जैमिंग और एंटी-स्पूफिंग तकनीक से लैस हों, ताकि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की स्थिति में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
सेना के लिए लॉजिस्टिक ड्रोन्स काफी फायदेमंद हो सकते हैं। ये ड्रोन्स खतरनाक क्षेत्रों में सैनिकों को जोखिम में डाले बिना ज़रूरी सामान तेज़ी से पहुंचाते हैं। दुर्गम पहाड़ी या युद्ध क्षेत्रों में जहाँ पारंपरिक वाहन नहीं पहुंच सकते, वहाँ ये ड्रोन्स आसानी से पहुंच बनाते हैं। इनके इस्तेमाल से समय बचता है, लागत कम होती है और सैन्य ऑपरेशन की दक्षता बढ़ती है। रात में या प्रतिकूल मौसम में भी ये ड्रोन्स आसानी से काम कर सकते हैं। लॉजिस्टिक ड्रोन्स की मदद से सेना की सप्लाई चेन मजबूत, सुरक्षित और तेज़ होती है, जिससे युद्धक्षेत्र में भी सफलता मिलती है।