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हिमाचल प्रदेश के बराबर बिजली निगल रहे हैं भारत के डेटा सेंटर, 5 साल में झारखंड को छोड़ेंगे पीछे

भारत के डेटा सेंटर हर साल बड़ी मात्रा में बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में देश की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी महत्वाकांक्षाएं अब बिजली की कमी की चुनौती का सामना कर रही हैं।
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Apr 01, 2026
Indian data center
Indian data center (Representational Photo)

भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी महत्वाकांक्षाएं अब बिजली की कमी की चुनौती से टकरा रही हैं। संसद में पेश 'संचार और सूचना प्रौद्योगिकी समिति' की 27वीं रिपोर्ट के अनुसार देश के डेटा सेंटर वर्तमान में 1,020 मेगावॉट बिजली की खपत कर रहे हैं। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अगले 2 वर्षों में यह मांग दोगुनी होकर 2,000 मेगावॉट और 5 वर्षों में 5 गीगावॉट (5,000 मेगावॉट) तक पहुंच सकती है। साथ ही के विस्तार के लिए छोटे 'एज सेंटर' जरूरी बताए गए हैं ताकि डेटा प्रोसेसिंग तेज़ हो, लेकिन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सरकारी स्तर पर ऐसे सेंटर बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

बेतहाशा बढ़ती बिजली की मांग

संसदीय समिति के समक्ष इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव की गवाही के अनुसार डेटा सेंटरों की वर्तमान ज़रूरत हिमाचल प्रदेश की कुल खपत के बराबर है। अगर यह मांग 5 गीगावॉट पहुंचती है, तो यह झारखंड जैसे राज्य की कुल बिजली खपत को भी पार कर जाएगी। इतनी बिजली पैदा करने के लिए कम से कम 4 बड़े थर्मल पावर प्लांट की पूरी क्षमता की ज़रूरत होगी।

चाइनीज़ उपकरणों से साइबर घुसपैठ का खतरा

रिपोर्ट में ग्रिड सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। मंत्रालय ने स्वीकार किया कि स्मार्ट मीटरों में चाइनीज़ उपकरणों के इस्तेमाल से साइबर घुसपैठ का खतरा है। अगस्त 2025 के नए निर्देशों के तहत चीन जैसे देशों से आने वाले हर उपकरण की भारत की लैब में अनिवार्य टेस्टिंग होगी। संसदीय समिति ने पहली बार छत पर लगे निजी सोलर प्लांट से ग्रिड हैकिंग की आशंका जताई है। सरकार ने माना कि फिलहाल इनके लिए कोई विशिष्ट साइबर सुरक्षा ढांचा नहीं है। ड्राफ्ट नियमों के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सोलर इनवर्टर का कंट्रोल और डेटा देश की सीमाओं के भीतर ही रहे। गौरतलब है कि 1 जनवरी 2026 से बिजली क्षेत्र में उपयोग होने वाले सभी आईटी उपकरणों को 'नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल' के 'ट्रस्टेड टेलीकॉम पोर्टल' से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

डेटा सुरक्षा के लिए सरकार दोहरे मोर्चे पर सजग सरकार

क्लाउड प्लेटफॉर्म पर मौजूद बिजली क्षेत्र का सारा डेटा भारत में ही एन्क्रिप्टेड रूप में रखना अनिवार्य किया गया है। साथ ही संवेदनशील डेटा के बैकअप के तौर पर विदेशी धरती पर 'डेटा एम्बेसी' बनाने पर चर्चा चल रही है, जो दूतावास की तरह भारतीय कानूनों के अधीन होगी।

Updated on:
01 Apr 2026 08:55 am
Published on:
01 Apr 2026 08:53 am