भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला बताया है। इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान को सीधी चेतावनी देते हुए देश के मामलों में टिप्पणी नहीं करने की नसीहत दी है।
India Warns Pakistan: भारत ने बुधवार को आतंकवादी संगठन और उसके सदस्यों के समर्थन में पाकिस्तान द्वारा की गई टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है। इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान को सीधी चेतावनी दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस्लामाबाद को भारत के आंतरिक मामलों और उसके न्यायिक प्रक्रियाओं पर कोई टिप्पणी करने का कोई अधिकार अधिकार नहीं है। दरअसल, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को आजीवन कारावास की सजा दिए जाने पर बयान जारी किया था। पाकिस्तान के बयान के बाद भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन और उसके सदस्यों के समर्थन में पाकिस्तान द्वारा जारी बयान को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं। पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों या उसके न्यायिक प्रक्रियाओं पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि, यह आश्चर्य की बात नहीं है कि एक ऐसा देश, जो लंबे समय से आतंकवाद का प्रायोजन कर रहा है। पाकिस्तान ऐसे बयान जारी कर रहा है, जो हिंसा और निर्दोष लोगों की हत्या का समर्थन करता है।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने पाकिस्तान को आत्ममंथन की नसीहत दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान का हिंसा का समर्थन करने वाला बयान भारत को आश्चर्य में नहीं डालता, क्योंकि इस्लामाबाद लंबे समय से आतंकवाद का प्रायोजन कर रहा है। झूठ और निराधार कथाओं को फैलाने के बजाय, पाकिस्तान को अपने गंभीर और व्यवस्थित मानवाधिकार उल्लंघनों पर आत्मचिंतन करना चाहिए।
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने मंगलवार को आसिया अंद्राबी को आतंकवादी कृत्यों की साजिश और भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने समेत विभिन्न अपराधों के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा कोर्ट ने आसिया अंद्राबी की सहयोगी सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30-30 वर्ष की जेल की सजा सुनाई है।
दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने सजा की मात्रा पर फैसला सुनाते हुए कहा कि दोषियों के कृत्य भारत के अस्तित्व पर ही प्रहार थे और वे जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने का प्रयास कर रहे थे, जबकि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न अंग है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से साबित होता है कि उन्होंने हिंसा से कभी घृणा नहीं की, बल्कि मारे गए आतंकवादियों की महिमा गाकर और अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देकर हिंसा को अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित किया। दोषियों का कृत्य सीधे हिंसा भड़काने के कारण नहीं हो सकते, लेकिन लोगों के मन, खासकर युवाओं के मन में यह विचार भरना कि कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है और भारत ने कश्मीर पर अवैध और शत्रुतापूर्ण कब्जा किया है। ऐसी भावनाएं जगा सकता है, जो उन्हें हिंसा सहित हर तरह के तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।