
प्रॉपर्टी को लेकर मालिक और कर्मचारी में थी खींचतान; सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐसा फैसला… (AI जनरेटेड इमेज)
Bengaluru Property Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलूरु की कथित बेनामी संपत्तियों के एक मामले में बड़ा फैसला देते हुए केंद्र सरकार को संबंधित जमीनों और संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने का निर्देश दिया है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि न्यायालय ऐसे लेन-देन को संरक्षण नहीं दे सकता, जो कानून की नजर में अवैध हों। अदालत ने कहा कि लोग अक्सर कानूनी रोक से बचने के लिए वास्तविक मालिक और कागजी मालिक को अलग दिखाते हैं, लेकिन अदालतें बाहरी स्वरूप नहीं बल्कि वास्तविक नियंत्रण और उद्देश्य को देखती हैं।
मामला बेंगलूरु के कारोबारी डी.ए. श्रीनिवास से जुड़ा है, जिन्होंने दावा किया था कि उनके कर्मचारी के. रघुनाथ ने भरोसे के आधार पर उनके लिए अपने नाम से कृषि जमीनें खरीदी थीं। बाद में इन्हें गैर-कृषि भूमि में बदलकर फिर श्रीनिवास को हस्तांतरित किया जाना था। इसके लिए दोनों के बीच एमओयू भी हुए थे। अदालत ने माना कि यह पूरी व्यवस्था कर्नाटक भूमि सुधार कानून से बचने और अप्रत्यक्ष रूप से जमीन खरीदने के उद्देश्य से बनाई गई थी, इसलिए यह बेनामी और अवैध है। रघुनाथ की 2019 में हत्या हो चुकी है और मामले की सीबीआइ जांच जारी है।
रघुनाथ की पत्नी मंजुला और बेटों ने अदालत में दावा किया कि विवादित संपत्तियां रघुनाथ ने स्वयं खरीदी थीं और उन पर परिवार का वैध अधिकार है। उन्होंने अपनी ओर से दूसरी वसीयत का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा-25 के तहत हत्या करने या उसमें मदद करने वाला व्यक्ति मृतक की संपत्ति का वारिस नहीं बन सकता। कोर्ट ने केंद्र को आठ सप्ताह में प्रशासक नियुक्त कर संपत्तियां कब्जे में लेने का निर्देश दिया।
Updated on:
10 May 2026 05:12 am
Published on:
10 May 2026 05:12 am
