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IIT भिलाई के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, अब शरीर में खुद घुल जाएंगे हड्डियों के प्लेट-स्क्रू, दूसरी सर्जरी से मिलेगी राहत

IIT Bhilai: शोधकर्ताओं ने मैग्नीशियम मिश्र धातु पर टाइटेनियम की बेहद पतली और मजबूत परत चढ़ाने की विशेष तकनीक विकसित की है, जिससे इम्प्लांट शरीर के भीतर अधिक समय तक सुरक्षित और मजबूत बना रहता है। बाद में धीरे-धीरे शरीर में घुल जाएगा।

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भारत

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Saurabh Mall

May 10, 2026

iit bhilai Bone Plate Technology

मेडिकल साइंस में नई उम्मीद, शरीर में घुलने वाले बोन प्लेट-स्क्रू की तकनीक तैयार (इमेज सोर्स: पत्रिका)

Bone Plate Technology: आइआइटी भिलाई के वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे हड्डियों में लगाए जाने वाले प्लेट, स्क्रू और अन्य मेडिकल इम्प्लांट इलाज पूरा होने के बाद शरीर में धीरे-धीरे स्वयं घुल जाएंगे। मरीजों को दोबारा ऑपरेशन कर इम्प्लांट निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह शोध डॉ. जोस इमैनुएल और रिसर्च स्कॉलर विग्नेश आर ने संयुक्त रूप से किया है। शोधकर्ताओं ने मैग्नीशियम मिश्र धातु पर टाइटेनियम की बेहद पतली और मजबूत परत चढ़ाने की विशेष तकनीक विकसित की है, जिससे इम्प्लांट शरीर के भीतर अधिक समय तक सुरक्षित और मजबूत बना रहता है। बाद में धीरे-धीरे शरीर में घुल जाएगा। इससे दूसरी सर्जरी की आवश्यकता लगभग समाप्त हो सकती है।

मैग्नीशियम को टाइटेनियम का साथ मिला

वैज्ञानिकों के अनुसार मैग्नीशियम शरीर के लिए सुरक्षित धातु मानी जाती है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि यह शरीर के भीतर तेजी से क्षरित हो जाती थी। इससे इम्प्लांट कमजोर पड़ने का खतरा रहता था। यह समस्या दूर करने के लिए शोधकर्ताओं ने मैग्नीशियम पर टाइटेनियम की विशेष कोटिंग विकसित की। परीक्षण में सामने आया कि पहले जहां धातु 7.66 मिलीमीटर प्रतिवर्ष की दर से क्षरित होती थी, वहीं नई तकनीक के बाद यह दर घटकर 2.93 मिलीमीटर प्रतिवर्ष रह गई।

बुजुर्ग और गंभीर मरीजों के लिए राहत

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक बुजुर्गों, गंभीर चोट वाले मरीजों और बार-बार सर्जरी से बचने वाले रोगियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। सामान्य तौर पर हड्डी टूटने पर डॉक्टर प्लेट, स्क्रू या स्टंट का इस्तेमाल करते हैं ताकि टूटी हड्डी को सहारा मिल सके। लेकिन इलाज पूरा होने के बाद इन्हें निकालने के लिए मरीज को दोबारा सर्जरी करानी पड़ती है। इससे दर्द, संक्रमण का खतरा और अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है।