ईरान और US-इजरायल के बीच 28 फरवरी से जंग जारी है। इस संघर्ष की वजह से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। इसका असर भारत के मेडिकल सेक्टर पर हुआ है। ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण भारत के मेडिकल सेक्टर में कितना नुकसान हुआ, आइए जानते हैं...
Iran and US-Israel Conflict: ईरान और US-इजरायल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुई जंग की वजह से पूरे पश्चिम एशिया के क्षेत्र में तनाव है। इस संघर्ष की वजह से भारत समेत दुनिया के कई देशों में होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के रास्ते से होने वाली गैस-तेल की सप्लाई (Gas and oil supply) बाधित हुई है। होर्मुज स्ट्रेट से क्रूड ऑयल (Crude Oil) और गैस की सप्लाई बाधित (Gas supply disrupted) होने से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट (Energy Crisis) पैदा हो गया है। इसके साथ ही ईरान-इजरायल युद्ध (Iran-Israel war) का असर भारत के मेडिकल सेक्टर में पड़ रहा है।
ईरान और US-इजरायल जंग की वजह से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट के हालात बन गए हैं। भारत के मेडिकल सेक्टर पर भी इस युद्ध का असर पड़ रहा है। ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से भारत के मेडिकल सेक्टर पर बड़ा नुकसान हो रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के कारण भारत में अंतरराष्ट्रीय मरीजों के आगमन में 30 से 40% तक की कमी हुई है।
मरीजों का आगमन कम होने से दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे प्रमुख शहरों के चिकित्सा संस्थानों की आय कम हुई है। चिकित्सान संस्थानों से जुड़े एक्सपर्ट बताते हैं कि युद्ध शुरू होने की वजह से मासिक राजस्व में 15-20% की गिरावट आई है। कुछ अस्पतालों की आय में लगभग 35% की गिरावट दर्ज की गई है। यह कमी विदेशी मरीजों के कम आने की वजह से हुई है।
इंडियन एक्सप्रेस ने एक्सपर्ट्स के हवाले से बताया कि ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से भारत में आने वाले विदेशी मरीजों की संख्या में लगातार कमी आई है। पिछले 2 हफ्तों में पश्चिम एशिया के क्षेत्र से आने वाले विदेशी मरीजों की संख्या में 50 से 75% तक कम मरीज आए हैं। विदेशी मरीजों की संख्या तेजी से कम होने से चिकित्सा संस्थानों की आय कम हुई है। दिल्ली के कुछ अस्पतालों में मेडिकल सेक्टर का राजस्व 30 से 40% तक गिर गया है।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से पश्चिम एशिया में विमानन सेवाएं प्रभावित हुई हैं। इस संघर्ष की वजह से पश्चिम एशिया क्षेत्र में लगभग 80% उड़ानें प्रभावित या रद्द हो गई हैं। ईरान, इराक, सीरिया और कुवैत के ऊपर हवाई क्षेत्र बंद होने से उड़ानों के मार्ग बदल दिए गए हैं। इसकी वजह से यात्रा समय और खर्च बढ़ गया है।
बता दें कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद DGCA ने सभी भारतीय एयरलाइंस को एडवाइजरी जारी की थी। एडवाइजरी में कहा गया था कि तेहरान, तेल अवीव, बेरूत, जेद्दा, बहरीन, मस्कट, बगदाद, अम्मान, कुवैत और दोहा जैसे हाई-रिस्क जोन के एयरस्पेस से बचें। यह सलाह सुरक्षा को ध्यान में रखकर दी गई थी। एयरलाइंस इसी के अनुसार रूट बदल रही हैं या उड़ानें रद कर रही हैं।
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