
TMC नेता अभिषेक बनर्जी(Photo- IANS)
West Bengal Assembly elections: पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में चुनाव होगा। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान होगा। पश्चिम बंगाल के चुनावी माहौल के बीच सत्ताधारी पार्टी TMC ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर जमकर भड़ास निकाली और गंभीर आरोप लगाए हैं। TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव से पहले बड़े स्तर पर अधिकारियों का ट्रांसफर और शुक्रवार को रामनवमी के दिन मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज में हुई हिंसा के मामले पर बीजेपी पर हमला बोला है।
TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की बुलडोजर शैली की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। अभिषेक बनर्जी ने X पर लिखा- चुनाव आयोग द्वारा राज्य में कई प्रशासनिक बदलाव किए जाने के बाद शुक्रवार को राम नवमी के जुलूस के दौरान मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज में हिंसा हुई। भाजपा, बंगाल की धरती पर इसी तरह का परिवर्तन थोपना चाहती है। चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने व्यापक स्तर पर प्रशासनिक बदलाव शुरू कर दिए और मुख्य सचिव, गृह सचिव, DGP, ADG, IG, SP, DM, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और यहां तक कि KMC कमिश्नर को भी बदल दिया। इस तरह के हस्तक्षेप से इरादे और समय को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
अभिषेक बनर्जी ने अधिकारियों के ट्रांसफर का हवाला देकर बीजेपी और चुनाव आयोग पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के ट्रांसफर के बाद जो हुआ है, वह और भी चिंताजनक है। इन बदलावों की आड़ में धमकियों की घटनाएं बढ़ रही हैं, दुकानों में तोड़फोड़ हो रही है। धर्म के नाम पर तनाव भड़काया जा रहा है। आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। हमें बुलडोजर मॉडल की जरूरत नहीं है। हमें नफरत और हिंसा की आयातित राजनीति की जरूरत नहीं है। बता दें कि रामनवमी जुलूस के दौरान हुई झड़प और पत्थरबाजी में जमकर तोड़फोड़ की गई। इस दौरान कई लोग घायल हुए हैं। बीजेपी का आरोप है कि शोभायात्रा जैसे ही फुलतला मोड़ के पास पहुंची तभी ईंट-पत्थर से हमला किया गया।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि TMC की पहचान हमारी साझी संस्कृति, हमारे मिलजुल कर मनाए जाने वाले कार्यक्रम, एक-दूसरे की मान्यताओं के प्रति हमारा सम्मान है। कई पीढ़ियों से बंगाल दुर्गा पूजा, दिवाली, पोइला बोइशाख, ईद, गुरु नानक जयंती, बुद्ध पूर्णिमा और क्रिसमस बिना किसी भय, विभाजन या हिंसा के एक साथ मनाता जाता है। कुछ दिनों में हमें क्रांतिकारियों की इस भूमि पर थोपे जा रहे परिवर्तन की एक भयावह झलक देखने को मिल रही है। आज, वही सामाजिक ताना-बाना तनाव में दिखाई दे रहा है। सवाल यह है कि इस व्यवधान से किसे लाभ हो रहा है? बंगाल की जनता को इसकी कितनी कीमत चुकानी पड़ रही है? चुनाव आयोग और भाजपा पर शर्म आती है।
Published on:
28 Mar 2026 06:16 pm
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