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अमरावती क्वांटम वैली की बड़ी कामयाबी, भारत ने -269°C पर हासिल की तकनीकी बढ़त

Quantum: आंध्र प्रदेश की अमरावती क्वांटम वैली ने स्वदेशी डायल्यूशन रेफ्रिजरेटर से 4 केल्विन यानी -269°C तापमान हासिल कर भारत को क्वांटम तकनीक की दौड़ में नई ताकत दी है। अब देश में ही क्वांटम हार्डवेयर, सेंसर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का परीक्षण संभव होगा, जिससे रक्षा, दवा खोज और एआई अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
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Jun 25, 2026
Future Supercomputer
भविष्य का सुपरकंप्यूटर(फोटो-X/@BharatTechIND)

Future Supercomputer: माइनस 269 डिग्री सेल्सियस, यह इतना कम तापमान है कि सामान्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण वहां काम करना तो दूर, लगभग निष्क्रिय हो जाएं। लेकिन भविष्य के जिन कंप्यूटरों से विज्ञान, चिकित्सा, रक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दुनिया बदलने की उम्मीद है, उन्हें काम करने के लिए ऐसी ही असाधारण ठंड चाहिए। आंध्र प्रदेश की अमरावती क्वांटम वैली ने स्वदेशी तकनीक से विकसित डायल्यूशन रेफ्रिजरेटर की मदद से 4 केल्विन यानी माइनस 269 डिग्री सेल्सियस तापमान हासिल कर लिया है। यह उस भविष्य की तैयारी है, जहां तकनीकी ताकत का पैमाना सिर्फ चिप्स, डेटा सेंटर या सुपरकंप्यूटर नहीं, बल्कि क्वांटम कंप्यूटिंग होगी।

आखिर इतनी ठंड की जरूरत क्यों?


आज हमारे मोबाइल, लैपटॉप और सुपरकंप्यूटर 0 और 1 की भाषा पर चलते हैं। लेकिन क्वांटम कंप्यूटरों की दुनिया अलग है। इनमें इस्तेमाल होने वाले क्वांटम बिट्स या क्यूबिट एक समय में कई संभावनाओं पर काम कर सकते हैं। यही क्षमता उन्हें ऐसी जटिल समस्याएं सुलझाने की ताकत देती है। क्यूबिट बहुत संवेदनशील होते हैं। तापमान में मामूली बदलाव, हल्का कंपन या आसपास का कोई इलेक्ट्रॉनिक शोर भी उनकी कार्यक्षमता बिगाड़ सकता है। इसलिए उन्हें लगभग अंतरिक्ष जैसी ठंडी परिस्थितियों में रखा जाता है, जहां पदार्थ की गतिविधियां न्यूनतम स्तर पर पहुंच जाती हैं।

अब विदेश जाने की जरूरत नहीं


अब तक भारतीय वैज्ञानिकों को ऐसे अत्यधिक ठंडे वातावरण में उपकरणों और सामग्रियों की जांच के लिए विदेशी प्रयोगशालाओं का सहारा लेना पड़ता था। इससे समय और संसाधन दोनों खर्च होते थे। अमरावती की नई सुविधा के बाद देश में ही क्वांटम हार्डवेयर, सेंसर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का परीक्षण किया जा सकेगा।

नई तकनीकी जंग का नया मैदान


हाल में चीन ने दुनिया का सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर बनाकर सुर्खियां बटोरीं। अमरीका पहले से ही एआइ और उन्नत चिप तकनीक में बढ़त बनाए हुए है। आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा क्वांटम तकनीक को लेकर होगी। अमरावती क्वांटम वैली में करीब 30 कंपनियां क्वांटम तकनीकों के लिए जरूरी उपकरण विकसित कर रही हैं।

दवा खोज से लेकर रक्षा अनुसंधान


जिस देश के पास बेहतर क्वांटम क्षमता होगी, वह दवा अनुसंधान, साइबर सुरक्षा, वित्तीय मॉडलिंग, मौसम पूर्वानुमान और रक्षा तकनीकों में बढ़त हासिल कर सकता है। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं।

Published on:
25 Jun 2026 05:31 am