
ईरान में नेतृत्व परिवर्तन के बाद भारत और ईरान के रिश्तों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद तेहरान में राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईद अल-अजहा संदेश पर नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने विशेष धन्यवाद भेजकर दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती देने का संकेत दिया है। हालांकि पीएम मोदी खुद मोजतबा के पिता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे, लेकिन भारत सरकार ने उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है और भारत संतुलित कूटनीति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे आधिकारिक संदेश में भारत के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक दोस्ती आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित है और आने वाले समय में इसे और मजबूत किया जाएगा। ईरानी नेतृत्व ने भारत की क्षेत्रीय सहयोग में अहम भूमिका का भी उल्लेख किया। माना जा रहा है कि सुप्रीम लीडर बनने के बाद मोजतबा खामेनेई की ओर से पीएम मोदी को भेजा गया यह पहला सीधा संदेश है। खास बात यह भी है कि सत्ता संभालने के बाद मोजतबा अब तक सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अयातुल्लाह अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण भेजा था। हालांकि आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी अपने पहले से तय विदेश दौरों और व्यस्त कार्यक्रम के कारण तेहरान नहीं जा पाएंगे। प्रधानमंत्री को आने वाले दिनों में इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्राएं करनी हैं। इसके बावजूद भारत ने इस कार्यक्रम को कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना है। भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होंगे।
अयातुल्लाह अली खामेनेई की फरवरी में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई थी। वह 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और उन्होंने लगभग 36 वर्षों तक इस्लामिक रिपब्लिक का नेतृत्व किया। उनकी मौत के बाद ईरान की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव आया है। ऐसे समय में भारत सावधानी के साथ अपने रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई का पीएम मोदी को भेजा गया संदेश दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता और संवाद जारी रहने का संकेत है।