पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI पंजाब में नई चाल चल रही है। बड़े हमलों की जगह अब छोटे ब्लास्ट, टारगेट किलिंग और ड्रग्स की तस्करी पर जोर है।
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पंजाब में अब पुराने तरीके छोड़कर नई चाल चल रही है। बड़े हमलों की जगह छोटे-छोटे ब्लास्ट, चुने हुए लोगों की हत्या और ड्रग्स की तस्करी पर जोर दिया जा रहा है।
खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईएसआई अब भारत के खिलाफ तीन तरफा रणनीति अपना रही है, जिससे पंजाब में तनाव धीरे-धीरे बढ़ाया जा सके लेकिन सुरक्षा बलों का पूरा ध्यान न खींचा जाए।
पिछले कुछ महीनों में पंजाब में कई छोटे ब्लास्ट हुए हैं। इनमें क्रूड बम और ग्रेनेड का इस्तेमाल हुआ। खुफिया अधिकारी बताते हैं कि इन ब्लास्टों का मकसद ज्यादा नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि सुरक्षा बलों का ध्यान भटकाना है।
असली काम पीछे से चल रहा है। जैसे कि पाकिस्तान से हथियार भेजना, ड्रग्स का नेटवर्क फैलाना और चुन-चुनकर हत्याएं करना।
स्थानीय युवकों को इन छोटे हमलों के लिए भर्ती किया जा रहा है। एक ऑपरेशन के लिए उन्हें 4 लाख रुपये तक दिए जा रहे हैं। इतना पैसा देखकर कई युवा आसानी से फंस रहे हैं।
खालिस्तान जैसी पुरानी बातों से अब युवा ज्यादा प्रभावित नहीं हो रहे, इसलिए आईएसआई पैसे का सहारा ले रही है। पंजाब में पहले से मौजूद ड्रग समस्या और अमीर बनने की चाहत ने भी कुछ युवाओं को कमजोर बना दिया है।
अधिकारी के मुताबिक, आईएसआई अब बड़े फिदायीन हमले या सीरियल ब्लास्ट जैसी घटनाओं से दूर रह रही है। उसकी नजर नरम निशानों पर है।
टारगेट किलिंग को ज्यादा तरजीह दी जा रही है क्योंकि ये सटीक होती हैं और डर फैलाने का अच्छा जरिया हैं। साथ ही हथियार और ड्रग्स की तस्करी जारी है। ये न सिर्फ पैसे कमाते हैं बल्कि हथियार जम्मू-कश्मीर तक भी पहुंचाए जा रहे हैं।
पंजाब पुलिस को अब इन छोटे ब्लास्टों पर खास नजर रखनी होगी। ये घटनाएं डर पैदा करती हैं और सुरक्षा बलों को एक जगह बांधकर रखती हैं, जबकि दूसरी तरफ ISI के लोग चुपके से अपना काम करते रहते हैं।
पहले जम्मू-कश्मीर की सीमा पर हथियार और ड्रग्स भेजना मुश्किल था। अब पंजाब बॉर्डर पर ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ गया है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसमें पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। उसके बाद बॉर्डर पर सुरक्षा बहुत कड़ी कर दी गई। ISI के कई प्रयास नाकाम हो चुके हैं।
पंजाब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। उन्हें हथियारों की आवक, ड्रग्स के नेटवर्क और टारगेट किलिंग पर नजर रखनी है। साथ ही युवाओं को ISI के जाल से बचाना भी बड़ा काम है।
आईएसआई की यह नई रणनीति धीमी लेकिन लगातार है। इसका मकसद पंजाब को अस्थिर रखना है बिना बड़े टकराव के। सुरक्षा बलों को अब सतर्क रहते हुए स्मार्ट तरीके से काम करना होगा ताकि ISI का प्लान कामयाब न हो सके।