
Israel Iran Conflict: भारत में इजराइल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए ग्लोबल शिपिंग में बाधा डालने और इंटरनेशनल ट्रेड को हाईजैक करने की ईरान की कोशिशें नाकाम रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि तेहरान को या तो अमेरिका के साथ समझौता करना होगा या फिर सीधे सैन्य नतीजों का सामना करना होगा।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे तनाव के संदर्भ में, राजदूत अजार ने ईरान के डिप्लोमैटिक रुख पर जोर दिया और चेतावनी दी कि अगर ईरान बातचीत के लिए सकारात्मक रुख नहीं अपनाता है, तो उसे सख्त प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने तेहरान पर 'बेईमानी' से बातचीत करने का आरोप लगाया।
खाड़ी में समुद्री यातायात को निशाना बनाने की कोशिशों पर राजदूत ने कहा कि जहाजों पर लगातार हमलों के बावजूद तेल की सप्लाई युद्ध से पहले के स्तर पर लौटकर स्थिर हो गई है। उन्होंने कहा कि, जलडमरूमध्य से निकलने वाले तेल की मात्रा युद्ध से पहले के स्तर पर है, हालांकि यह आसानी से नहीं हो रहा है क्योंकि कई कंपनियां अभी भी वहां जहाज नहीं भेज रही हैं।
अजार ने कहा कि, इंटरनेशनल कम्युनिटी से जबरदस्ती फायदा उठाने की उनकी कोशिश नाकाम रही है। उन्होंने इसे दुनिया के सभी तानाशाहों के लिए सबक बताया कि वे धमकाकर विनाशकारी नीतियां आगे नहीं बढ़ा सकते, जैसे बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले हथियार बनाना, दूसरे देशों पर कब्जा करना और आतंकवादी प्रॉक्सी को फंडिंग देना।
ट्रंप ने गुरुवार को कहा था कि, अब मुझे एक फैसला लेना है, या तो ईरान समझौते पर हस्ताक्षर करे, या फिर उसका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। ऐसी बैठक इससे पहले जून 2025 में हुई थी, जो इजराइल-ईरान युद्ध शुरू होने से ठीक पहले की बात है।
शुक्रवार को 'एक्सियोस' ने तीन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट दी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोगियों ने कैंप डेविड में गुप्त बैठक की। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, युद्ध मंत्री पीटर हेगसेथ, दूत स्टीव विटकॉफ, CIA निदेशक जॉन रैटक्लिफ और जनरल डैन केन शामिल थे। बैठक में ईरान के साथ युद्ध के अगले कदमों और यमन में हौथी विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी-समर्थित अभियान पर चर्चा हुई। व्हाइट हाउस ने कोई बयान देने से इनकार कर दिया।